उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की उत्तराखंड स्टेट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (यूकेएसईई) काउंसिलिंग सवालों के घेरे में आ गई है। काउंसिलिंग बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि उन्हें बिना बताए ही सीटों का आवंटन कर दिया गया, जबकि विवि के कुलपति का कहना है कि काउंसिलिंग में सदस्यों की जरूरत नहीं है।
तकनीकी विवि ने एक से तीन अप्रैल के बीच बीफार्मा, बीएचएमसीटी, एमबीए, एमसीए जैसे कोर्सेज में दाखिले को यूकेएसईई काउंसिलिंग आयोजित कराई। काउंसिलिंग में नियमानुसार राज्य सरकार की ओर से गठित नौ सदस्यीय काउंसिलिंग बोर्ड के कम से कम 50 प्रतिशत सदस्यों का उपस्थित होना जरूरी थी।
लेकिन यहां न तो विवि के परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी मिली और न ही कुलसचिव को। काउंसिलिंग बोर्ड में विवि के कुलपति चेयरमैन और परीक्षा नियंत्रक, कुलसचिव व तीनों संघटक कॉलेजों के निदेशक सदस्य होते हैं। एक सदस्य शासन द्वारा नामित भी होता है। आरोप है कि इन सभी सदस्यों को काउंसिलिंग की जानकारी ही नहीं मिल पाई। इससे विवि की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।