कानपुर में असलहा बाबू की अलमारी का ताला तोड़े जाने के बाद खुलासा हुआ है कि फर्जी असलहा लाइसेंसों के दस्तावेज भी जाली हैं। फर्जी लाइसेंसों पर जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत के फर्जी साइन की पुष्टि तो जांच कमेटी ने पहले ही कर दी थी। फर्जीवाड़े के सबूत मिटाने की हड़बड़ी में असली लाइसेंसों की 60 फाइलें भी गायब कर दी गईं। दस्तावेजों के साथ खाली स्टांप मिले हैं।
अमर उजाला ने एक अगस्त को फर्जी असलहा लाइसेंस जारी होने का खुलासा किया था। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में वरासत में रिवाल्वर का फर्जी लाइसेंस जारी होने की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट में रायफल और बंदूक के दो और लाइसेंस जारी कराने की बात कही गई थी। इन दोनों असलहों की किताब (बुकलेट) जारी नहीं हो सकी थी। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि 90 फर्जी लाइसेंस जारी हुए हैं। इनमें से 73 की बुकलेट भी जारी हो गई हैं। सी
डीओ ने गुरुवार को असलहा बाबू विनीत की अलमारी का ताला तुड़वाकर सभी फाइलें और दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे। सभी फाइलों की जांच के बाद सीडीओ ने जिलाधिकारी को बताया है कि फर्जी लाइसेंस जारी करने में जाली दस्तावेज लगाए गए हैं। जिलाधिकारी ने एक साल में 90 वैध लाइसेंस जारी किए थे। इनमें से 60 लाइसेंस की फाइलें भी गायब मिलीं। सिर्फ 30 लाइसेंस की फाइलें मिली हैं। बनाए गए फर्जी 90 लाइसेंसों की फाइलें ही नहीं मिली हैं।