झज्जर। समाधान शिविर में कई ऐसे मामले हैं जिनमें पीड़ित महीनों से चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। कुछ लोगों का तो कहना है कि शिविर में चक्कर काट-काट कर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
लघु सचिवालय स्थित हाल में वीरवार को आयोजित समाधान शिविर में एडीसी जगनिवास ने परिवादियों की समस्याएं सुनीं। समस्याएं सुनाकर बाहर आए गिरावड़ गांव निवासी देवेंद्र और अभिमन्यु ने बताया कि उनके खेतों से पावरग्रिड नरेला ट्रांसमिशन लिमिटेड की एक लाइन गुजरी थी।
लाइन डालते समय उनकी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। जब विरोध किया तो कंपनी ने एक फार्म भरकर दिया था और कहा था कि इसके लिए मुआवजा मिल जाएगा। उस मुआवजे के लिए पांच माह से चक्कर काट रहे हैं, मगर आज तक एक रुपया भी नहीं मिला है।
पांच महीने से हर सप्ताह दो बार समाधान शिविर में आते हैं। अब यहां से भी विश्वास उठ चुका है। मुआवजे के लिए चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। अफसर न मुआवजा दिला रहे हैं और न ही मना कर रहे हैं।
मातनहेल तहसील के गांव खोरड़ा निवासी प्रवीण अपनी मां के साथ समाधान शिविर में आए थे। उसने बताया कि फैमिली आईडी में उनकी आय तीन से पांच लाख रुपये दर्शाई गई है। यह गलत है। परिवार की वार्षिक आय 140000 से ज्यादा नहीं है।
यह समस्या जब अफसरों को बताई तो उन्होंने कहा कि अगर यह गलत अपलोड हुई है तो तीन साल में अपने आप ठीक हो जाएगी। बताया कि पिता कैंसर से पीड़ित हैं। फैमिली आईडी में आय ज्यादा दिखाने के कारण सरकार से मिलने वाली सभी सुविधाएं बंद हो गई हैं।
रामपुरा निवासी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि उसने समाधान शिविर में अलग-अलग समस्याओं से संबंधित करीब 35 शिकायत की हैं। इनमें भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के मामले भी शामिल हैं। मगर उन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। अधिकारी यह कह देते हैं कि इतनी ज्यादा शिकायतें लेकर बार-बार मत आया करो। सभी शिकायतें एक बार में ही बता दिया करो।
वर्जन
संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का समय से समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर में 6 शिकायतें दर्ज हैं जिन पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। -जगनिवास, एडीसी झज्जर