मदरसे के रिकार्ड में अब्दुल्ला की फोटो
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बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून छह साल पहले मुजफ्फरनगर में दाखिल हो गया था। आतंकी अब्दुल्ला ने जनपद और आसपास में आतंक के लिए जमीन तलाशनी शुरू कर दी थी। वर्ष 2011 में कुटेसरा के मदरसा जामिल उलूम में हाफिज की पढ़ाई करने के बाद वह शहर के सरवट पहुंचा था। सरवट के मदरसा महमूदिया में आतंकी अब्दुल्ला ने मौलवी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। खास बात यह है कि आतंकी ने मदरसे में नाम-पता गलत दर्शाया। मदरसे के रिकार्ड में आतंकी ने अपना नाम मोहम्मद अब्दुल, निवासी जिला पश्चिम त्रिपुरा दिखाया है। एक साल तक पढ़ाई करने के बाद वह मदरसा छोड़कर चला गया।
मुजफ्फरनगर के चरथावल के गांव कुटेसरा से एटीएस के हत्थे चढ़ा बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून छह साल पहले जिले में दाखिल हुआ था। बांग्लादेश में बैठे आकाओं के इशारों पर वह जगह बदलने के साथ नाम-पते भी बदलता रहा। वर्ष 2011 में मुजफ्फरनगर में आने के बाद पहले कुटेसरा के मदरसा जामिल उलूम में हाजिफ की पढ़ाई की। एक साल पढ़ने के बाद मुजफ्फरनगर शहर के सरवट गांव में शरण ली। यहां पर अब्दुल्ला ने सरवट के मदरसा महमूदिया में मौलवी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून ने मदरसे में 27 सितंबर 2012 को असली नाम-पता छिपाकर दाखिला पाया था।
आतंकी ने मदरसे के रिकॉर्ड में खुद का नाम मोहम्मद अब्दुल, पिता का नाम मोहम्मद गफ्फार, निवासी जिला पश्चिमी त्रिपुरा लिखाया है। मदरसे के रिकार्ड में उसकी जन्मतिथि 6 मई 1991 दर्ज है, जिसके चलते उसकी उम्र 21 वर्ष लिखी गई थी। मदरसे के रिकार्ड के अनुसार आतंकी ने दाखिले के दौरान खुद को कुटेसरा में पढ़ना बताया था। साथ ही आलिम बनने की इच्छा भी जाहिर की थी। दाखिले की मुकम्मल प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसकी पढ़ाई शुरू हुई। अब्दुल्ला बेहद शांत रहने वाला छात्र था।
महमूदिया मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने 8 माह 21 दिन गुजारे थे। मदरसे की मौलवियत के सात पेपर देने के बाद 19 जून 2013 को वह मदरसा छोड़कर चला गया था। मदरसे में रहते हुए कभी उसने किसी को शक नहीं होने दिया, लेकिन आतंकी मुजफ्फरनगर में रहकर आतंक के मंसूबों को मुकम्मल करने में लगा रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुजफ्फरनगर में 2013 में ही दंगा हुआ था। उस दौरान उसकी लोकेशन कहां रही और वह क्या कर रहा था, इसकी जानकारी अभी तक किसी के पास नहीं है।