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IIT पासआउट स्टूडेंट्स का कमाल, 13 देशों तक पहुंचाई अपनी प्रतिभा, बिजली का बिल बचाकर जगमगाते हैं घर

Thu, 21 May 2026 10:02 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

आज Ecozen के उत्तर प्रदेश भर में 100 से ज्यादा Solar Heroes हैं। उनमें से किसी ने भी हमसे जुड़ने के लिए अपनी पुरानी जिंदगी नहीं छोड़ी
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सोलर एनर्जी - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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जब हमने 2010 में Ecozen की शुरुआत की, तो हमने एक ऐसा फैसला लिया जो शायद सबको अटपटा लगा। हम पहले शहरों की तरफ नहीं गए। हम खेतों की तरफ गए जहां किसान अपनी फसल इसलिए नहीं खो रहे थे क्योंकि मौसम खराब था, बल्कि इसलिए कि गलत वक्त पर बिजली चली जाती थी। जहां बिजली का ग्रिड एक ऐसा वादा था जो देर से आता था और जल्दी चला जाता था। जहाँ जिन लोगों को भरोसेमंद ऊर्जाकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, वे उन लोगों से सबसे दूर थे जो इसे पूरी तरह सुलझाने को तैयार हों। 
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पंद्रह साल बाद भी, वही सोच हर काम में हमारी राह दिखाती है। क्योंकिउन शुरुआती वर्षों ने हमें — खेतों में, गाँवों में, उन लोगों से बातचीत में जिनके लिए एक खराब पंप का मतलब पूरे सीजन की बर्बादी था जो सिखाया, वो कोई तकनीक नहीं सिखा सकती। 
 
भारत में लोग किसी तकनीक को सिर्फउसकी खूबियों की वजह से नहीं अपनाते। वे उसे भरोसे की वजह से अपनाते हैं। जब सोलर भारत के शहरों और कस्बों में आया, तो हर दूसरे प्रोडक्ट की तरह इसे भी वैसे ही बेचा जाने लगा — सेल्स टीम, कैंपेन और कॉल सेंटर। जो बात लगातार नजरअंदाज होती रही, वो यह थी किफैसले असल में कैसे होते हैं खासकर प्रयागराज जैसे शहर में। 
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एक परिवार जो रूफटॉप सोलर के बारे में सोच रहा है, वो सबसे अच्छा ब्रोशर नहीं ढूंढ रहा। वो किसी ऐसे शख्स को ढूंढ रहा है जिसे वो पहले से जानता हो — कोई जो तीन गलियाँ छोड़कर रहता हो, वही बिजली के बिल भरता हो, और जिसका अपने मोहल्ले की भलाई के अलावा कोई और मकसद न हो — जो उसे सच में बताए कियह काम करता है या नहीं। 
 
ऐसा इंसान भारत के हर मोहल्ले में पहले से मौजूद है। वो ग्राम पंचायत का मुखिया जिसने एक दशक से हर स्थानीय विवाद सुलझाया हो। वो मीटर रीडर जो जानता हो किकौन से घर चुपचाप मुश्किल में हैं। वो समाज का वो चेहरा जिसकी बात, एक बार कह दी जाए, तो लोगों का मन बदल देती है। हम उन्हें Solar Heroes कहते हैं। हमने उन्हें बनाया नहीं। हमने बस उन्हें पहचाना। 
 
आज Ecozen के उत्तर प्रदेश भर में 100 से ज्यादा Solar Heroes हैं। उनमें से किसी ने भी हमसे जुड़ने के लिए अपनी पुरानी जिंदगी नहीं छोड़ी। जो बदला वो यह है किअब वो हर बातचीत में क्या लेकर जाते हैं। Ecozen की ट्रेनिंग से मिला आत्मविश्वास, और यह यकीन किजब वो अपने पड़ोसी को बताएँगे किउनका बिजली का बिल 80 से 90 फीसदी कम होगा, तो वाकई होगा। 
यह मेल  गहरा स्थानीय भरोसा और साबित तकनीक — बाहर से नहीं बनाया जा सकता। यह समुदाय के भीतर से ही उगना पड़ता है। 
 
 
जब कोई परिवार सोलर लगाता है और उनका बिल बदलता है, तो पड़ोसी देखता है। सवाल पूछता है। किसी ऐसे से सच्चा जवाब पाता है जिस पर भरोसा हो। Solar Hero को दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं पड़ती मोहल्ला खुद उनके पास आता है। हम यही मानना है किभारत का ऊर्जाबदलाव असल में इसी तरह होगा - इस देश के सबसे पुराने नेटवर्कसे — एक पड़ोसी का दूसरे पर भरोसा।
 
हर Solar Hero अपनी पुरानी जिंदगी के साथ-साथ एक सार्थक अतिरिक्त आमदनी कमाता है। हर इंस्टॉलेशन एक बड़े दायरे को सक्रिय करती है — स्थानीय डीलर, स्थानीय तकनीशियन, स्थानीय लोग स्थानीय छतों पर। जो पैसा पहले बिजली के बिल के रूप में समुदाय से बाहर जाता था, वो धीरे-धीरे यहीं रहने लगता है।
 
यही है एक सच्ची स्थानीय ऊर्जाअर्थव्यवस्था। शोषण नहीं — संचलन। प्रयागराज में हम कोई सोलर नेटवर्कनहीं बना रहे। हम एक ऐसे इंसानी नेटवर्कको मजबूत कर रहे हैं जो पीढ़ियों से यहाँ है — और उसे कुछ ऐसा दे रहे हैं जो सच में ले जाने लायक हो।
 
भारत का स्वच्छ ऊर्जाभविष्य एक दिन गीगावाट में गिना जाएगा। हम इसे अलग तरह से गिनते हैं — उस Solar Hero में जो किसी रविवार की दोपहर एक हिचकिचाते परिवार के साथ बैठा, हर सवाल का ईमानदारी से जवाब दिया, और उस घर की बातचीत बदल दी।
वो नेटवर्कपहले से यहाँ था। हमें बस उसका हिस्सा बनने का हक कमाना था।
 
देवेंद्र गुप्ता, Ecozen Solutions के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। 2010 में IIT खड़गपुर के पूर्वछात्रों द्वारा स्थापित, Ecozen के 13 देशों में 5 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन हैं और यह भारत का अग्रणी विकेंद्रीकृत ऊर्जाप्लेटफॉर्महै।
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