मध्यप्रदेश के इंदौर के एक निजी नर्सिंग होम में अन्य बीमारियों के मरीजों का इलाज कर रहे दो डॉक्टर सोमवार को कोविड-19 से संक्रमित पाए गए। इसके बाद प्रशासन ने इस चिकित्सा संस्थान को अस्थायी रूप से बंद करते हुए संक्रमणमुक्त करने का फैसला किया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) प्रवीण जड़िया ने बताया कि शहर के राजबाड़ा क्षेत्र के अर्पण नर्सिंग होम की एक महिला डॉक्टर और एक पुरुष डॉक्टर कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि, निजी क्षेत्र का यह चिकित्सा संस्थान ग्रीन श्रेणी का है यानी वहां इस महामारी के मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम के पूरे स्टाफ के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। हाल के दिनों में इस संस्थान में इलाज कराने वाले मरीजों की पहचान की जा रही है और उनकी सेहत की भी जांच की जाएगी। सीएमएचओ ने बताया कि नर्सिंग होम के आस-पास के इलाके को निषिद्ध क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) घोषित कर सील किया जा रहा है।
इस बीच, जिलाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि अर्पण नर्सिंग होम में फिलहाल कुछ मरीज भर्ती हैं। इन मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजा जायेगा। फिर नर्सिंग होम को अस्थायी रूप से बंद कर संक्रमणमुक्त किया जायेगा।
उन्होंने कहा, 'जिले के छोटे अस्पतालों और डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों को खोलने की अनुमति फिलहाल नहीं दी जाएगी। यह देखा गया है कि इन जगहों पर कोविड-19 से बचाव की पर्याप्त सावधानियां नहीं बरती जातीं जिससे डॉक्टरों और मरीजों, दोनों में इसका संक्रमण फैलने का खतरा होता है।'
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इंदौर, देश में कोरोना वायरस के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक है। रेड जोन में शामिल जिले में अब तक इस महामारी के 1,611 मरीज मिले हैं। इनमें से 77 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।
पूरे देश में कोरोना वायरस के प्रकोप में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले 24 घंटे में 2553 नए मामले सामने आए हैं और 72 लोगों की मौत हुई है। वहीं, इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल इंदौर में एक 82 वर्षीय मरीज की कोरोना से मौत हो गई है। इसके साथ ही जिले में इस वायरस के संक्रमण से मरने वाले मरीजों की तादाद बढ़कर 77 पर पहुंच गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) प्रवीण जड़िया ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि कोविड-19 से संक्रमित 82 वर्षीय पुरुष ने रविवार को एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह मधुमेह और श्वसन तंत्र संबंधी रोग (सीओपीडी) से पहले ही जूझ रहा था।
सीएमएचओ ने बताया कि रेड जोन में शामिल जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना वायरस के 43 और मरीज मिलने के बाद इस महामारी की जद में आए लोगों की तादाद 1,568 से बढ़कर 1,611 पर पहुंच गई है। इनमें से 362 मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ होने पर अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि स्थानीय अस्पतालों के कोविड-19 वॉर्ड से सोमवार को 100 से ज्यादा मरीजों को छुट्टी दी जाएगी।
सीएमएचओ ने जिले में कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण में होने का दावा करते हुए कहा कि अगर आम लोगों ने लॉकडाउन के तीसरे चरण में सरकारी हिदायतों का पूरी तरह पालन किया, तो जिले में इस महामारी के हालात में और सुधार होगा। इंदौर जिले की आबादी 35 लाख से ज्यादा है। जड़िया ने दावा किया कि कोविड-19 के सर्वेक्षण के दौरान जिले के 28.33 लाख लोगों तक पहुंचा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हमने सर्वेक्षण के दौरान सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत के लक्षणों के आधार पर करीब 9,000 लोगों को छांटा है। कोविड-19 की जांच के लिए इनके नमूने लिए जाने का अभियान सोमवार से शुरू कर दिया गया है।
ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सोमवार सुबह की स्थिति में जिले में कोविड-19 के मरीजों की मृत्यु दर 4.78 फीसदी थी। हालांकि, पिछले 25 दिन के दौरान इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंदौर में प्रशासन ने 25 मार्च से शहरी सीमा में कर्फ्यू लगा रखा है जबकि जिले के अन्य स्थानों में सख्त लॉकडाउन लागू है।