नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया ने अनुपूरक प्रश्न में मुख्यमंत्री से पूछा कि पौंग डैम के विस्थापित कों कब तक पुनर्वास करेंगे। पैसा किसी के लिए और खर्च कहीं और हुआ है? प्रभावित लोगों को हमीरपुर, ऊना व धर्मशाला शिफ्ट होना पड़ा?
इसके जबाव में सीएम जयराम ने कहा कि ऐसा नहीं होगा। जो पहले से हो रहा है, भाजपा सरकार की ओर से अब यह नहीं होगा। सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने भी सदन में इस मामले पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए सीएम से पूछा कि लोग बांध में डूब गए, जमीनें खत्म हो गई।
लोगों के साथ जो वायदे किए गए थे वह पूरे नहीं किए? सीएम ने कहा कि कुछ लोगों को राज्यस्थान में जमीनें दी भी है जहां यह जमीनें दी गई वहां लोग बसना नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि लोग अब जमीन के बजाए आर्थिक मदद भी मांग रहे हैं। पौंग बांध में विस्थापितों की संख्या 20,722 हैं।12041 लोगों को मरब्बे दिए गए और 4128 मामले निरस्त किए गए।
निरस्त किए गए -
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि चांशल घाटी पर्यटन की दृष्टि से विकसित होगी। प्रदेश सरकार ने इसकी डीपीआर तैयार कर ली है। इस पर 13.65 लाख रुपये की राशि खर्च किए गए हैं।
चांशल घाटी में पैराग्लाइडिंग के अलावा सभी साहसिक क्रीड़ा होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार के संसाधन कम है, इसके चलते समय लग रहा है। पर्यटन पर लंबे भाषण होते रहे हैं लेकिन आगे नहीं बढ़ पाए।
सीएम ने यह जानकारी रोहडू़ के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल अभी धर्मशाला, शिमला, डलहौजी, चंबा, कुल्लू, मनाली पर्यटन स्थलों से जाना जाता है।
सरकार का प्रयास है कि हिमाचल में और भी पर्यटन स्थल विकसित हों। उन्होंने कहा कि सरकार रोहडू़ विधानसभा क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का विचार रखती है।
इसके तहत तांगणू, टिक्कर, पुजारली, चिड़गांव, ब्रासली, बछूंछ, करछारी, शरोग, रंटाडी, संदौर और डोडरा क्वार आदि स्थानों के विकास के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है।कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बजट में अलग से राशि का प्रावधान करवाए जाने का मामला उठाया।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि वे पूरी शक्ति से नयना देवी के कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर की ओर से रखे गए संकल्प प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध की स्थापना के दौरान बड़ी संख्या में लोग उजड़ गए।
हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों को इस बांध के बन जाने का लाभ मिला, लेकिन किसी ने भी उजडे़ हुए लोगों को बसाने को गंभीर कदम नहीं उठाए। ये मसला बार-बार भारत सरकार के समक्ष उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि विस्थापितों को उचित ठिकाने मिलने चाहिए। भाखड़ा देश की एक बहुत बड़ी परियोजना थी। इसके लिए हिमाचल के लोगों ने बलिदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जहां पर बसे हैं, उन्हें वहां से उजाड़ा न जाए। वहीं पर बसाया जाए। पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। वर्तमान सरकार भी उठाए।