मृतक नेमीचंद के भाई ने आरोप लगाया कि उसके भाई को पुलिस ने 30 जून को पकड़ा था और उसे अवैध तरीके से हिरासत में रखा। उन्होंने कहा, ‘उसके बाद पुलिसकर्मी तीन जुलाई को मेरे भाई के साथ घर आए थे और वे उसी दिन मेरे भाई और मेरी पत्नी को अपने साथ ले गए थे। पुलिस थाने के रास्ते में मेरे भाई ने मेरी पत्नी को बताया कि पुलिस कर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे प्रताड़ित किया। उन्होंने (पुलिसकर्मियों ने) मेरे भाई और मेरी पत्नी को अवैध तरीके से हिरासत में रखा। छह जुलाई को पुलिस ने मेरे भाई की हत्या कर दी।’
नेमीचंद के भाई ने आरोप लगाया, ‘पुलिसकर्मियों ने मेरी पत्नी के साथ मारपीट की। उसकी उंगलियों को कुचलने के साथ ही नाखून तक उखाड़ डाले और उसे प्रताड़ित करने के साथ उससे सामूहिक दुष्कर्म किया।’ उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी पुलिस हिरासत में उसके छोटे भाई की हत्या की गवाह है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने मृतक नेमीचंद का अंतिम संस्कार सात जुलाई को करने के लिए परिजनों पर दबाव बनाया।
जयपुर के सवाई मान सिंह चिकित्सालय में इलाज करा रही पीड़िता की हस्ताक्षरित शिकायत परिजनों की ओर से पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह के नाम शुक्रवार को भेजी गई थी जिसके बाद शनिवार को पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने चुरू के जिला पुलिस अधीक्षक को हटा दिया है। वहीं इस मामले में सीओ को निलंबित किया गया है।
राज्य सरकार ने शुक्रवार देर रात यह कार्रवाई की। कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार चुरू के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेंद्र कुमार को प्रशासनिक कारणों के चलते एपीओ पदस्थापन की प्रतीक्षा में कर दिया गया है। वहीं सरदार शहर के सीओ भंवरलाल को निलंबित किया गया है।
पीड़ित परिजनों की मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुनील क्रांति ने बताया कि हम आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। यह पुलिस का क्रूर चेहरा है और पीड़ित परिजनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर हम राज्यव्यापी प्रदर्शन-आंदोलन करेंगे।
पुलिस ने बताया कि मृतक नेमीचंद को सरदार शहर पुलिस ने छह जुलाई को गिरफ्तार किया था और उसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहां उसकी उसी रात मौत हो गई थी।