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गठबंधन पर सवाल उठाना भाजपा के इस नेता को भारी पड़ा, इस पद से हुई छुट्टी

Fri, 24 Mar 2017 10:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जनार्दन शर्मा
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पंजाब विधानसभा में करारी हार का सामना कर चुकी भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पंजाब में हार को भाजपा सच से सामना करने डर रही है। जब सच का सामना हो रहा है, तो उसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। वीरवार को पार्टी की चुनावी हार के कारणों का खुलासा मीडिया के सामने करने वाले भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक जनार्दन शर्मा को अगले ही दिन पंजाब भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला ने संयोजक पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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जनार्दन शर्मा ने वीरवार को पार्टी की हार के कारणों का खुलासा करते हुए कहा था कि एक तरफ जहां देश भर में भाजपा का परचम लहरा रहा है, वहीं पंजाब में गठबंधन के चलते पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की जनहितैषी और विकासवादी नीतियों के चलते जहां देश के चार अन्य प्रदेशों में भाजपा के जनाधार में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है, वहीं पंजाब में जनाधार घटा है। 

जनार्दन शर्मा ने इसके साथ ही पंजाब भाजपा के नेताओं को नसीहत देते हुए यह भी कहा कि अब समय केवल दिखावटी चिंतन करने का नहीं बल्कि संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से सटीक दिशा देने का है ताकि भाजपा का जनाधार बाकी प्रदेशों की तरह बढ़ सके। शर्मा ने कहा कि बीते दस वर्षों से सत्ता में रही गठबंधन सरकार ने अपनी विश्वसनीयता इस कदर खो दी थी कि उसका परिणाम शर्मनाक हार के रूप में हमारे सामने आया है। 
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हार पर ये दिया था बयान

पंजाब भाजपा
विधानसभा चुनाव में हार के लिए जनार्दन शर्मा ने अपनी पार्टी के नेताओं को भी निशाने पर लेते हुए कहा था कि भाजपा नेताओं की अपने ही संगठन के कार्यकर्ताओं से दूरी भी पराजय का कारण बनी है। कार्यकर्ता जोकि संगठन की रीढ़ की हड्डी होते है, उनकी नेताओं के प्रति उदासीनता भी हार का अंतर बढ़ा गई।

इसके अलावा सत्ताधारी नेताओं के आपसी मतभेद, पार्टी को एक प्राइवेट कंपनी की तरह चलाना भी बड़ी समस्या बन गया। भाजपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में अपने बलबूते पर प्रचंड लोकतांत्रिक समर्थन पाने के चलते अपनी साख को सुदृढ़ किया है, लेकिन पंजाब में हाईकमान से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद भी अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने का फैसला नहीं ले पाए।
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