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लोकगायकी के 'हीरे' ने दुनिया को कहा अलविदा, नहीं रहे बिरहा सम्राट पद्म श्री हीरा लाल यादव 

Sun, 12 May 2019 03:34 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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पद्म श्री हीरा लाल यादन - फोटो : अमर उजाला
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पूर्वांचल, बिहार तक अपनी लोकगायकी से लाखों के हृदय में बसने वाले हीरा लाल यादव ने रविवार को दुनिया को अलविदा कह दिया है। वह करीब 83 वर्ष के थे। कई दिनों से वह अस्वस्थ चल रहे थे और वाराणसी के भोजूबीर स्थित एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 

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शनिवार देर देर रात हीरा लाल यादव को चौकाघाट स्थित आवास पर लाया गया और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। हीरा लाल यादव के पुत्र सत्यनारायण यादव ने बताया कि दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। इसी साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर हीरा लाल यादव को पद्मश्री मिलने की घोषणा की गई थी। इस बीच पीएम मोदी ने उनकी मृत्यु पर ट्विटर पर शौक प्रकट किया है। उन्होंने लिखा है, 'पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वाराणसी के बिरहा गायक श्री हीरालाल यादव जी के निधन की खबर से अत्यंत दुख हुआ। दो दिन पहले ही बातचीत कर उनका हालचाल जाना था। उनका निधन लोकगायकी के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके प्रशंसकों और परिवार के साथ हैं।'
 

 

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हीरा बुल्लू की जोड़ी सात दशकों तक की धमाल

हीरा लाल यादव के अंतिम दर्शन करने पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय - फोटो : अमर उजाला
16 मार्च को राष्ट्रपति भवन में महामहिम रामनाथ कोविंद ने पद्म अलंकार प्रदान किया। अस्वस्थ्य होने के बाद भी वह राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने भी हीरा लाल यादव से आशीर्वाद लिया था। 70 वर्ष में पहली बार बिरहा को पद्म श्री सम्मान मिला था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भी इसका उल्लेख भी किया था। 

हीरालाल के निधन की सूचना से शोक की लहर फैल गयी। तमाम लोग उनके आवास पर पहुंचकर संवेदना प्रकट कर रहे हैं। बिरहा सम्राट को श्रद्धांजलि देने पहुंची सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी शालिनी यादव और कांग्रेस के प्रत्याशी अजय राय भी पहुंचे हैं।

भाजपा उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी सुनील ओझा ने कहा कि काशी से अपने एक सच्चे लाल को खो दिया। भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि देश की लोकगायकी में कोई दूसरा हीरा नहीं मिलेगा।

करीब सात दशक तक हीरा बुल्लू की जोड़ी गांव शहर में बिरहा की धूम मचाती रही। दोनों ही गायक राष्ट्रभक्ति गीतों से स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाते रहे। हीरा लाल यादव के साथी बुल्लू यादव का निधन पहले ही हो चुका था। 
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