फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक्सिस बैंक में फर्जी कंपनियों के खातों का जाल काफी बड़ा, 63 खातों में 165 करोड़ जमा

Wed, 21 Dec 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
एक्सिस बैंक में फर्जी कंपनियों के खातों का जाल काफी बड़ा है। आयकर विभाग को अब तक की जांच में पता चला है कि नोटबंदी के बाद 63 खातों में 165 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। यह खाते काफी पुराने हैं। यह रकम सेक्टर 51 और दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित शाखा में ही नहीं, बल्कि सेक्टर-18 स्थित एक्सिस बैंक में भी जमा की गई थी।
विज्ञापन


शुरुआत में 20 ऐसे खातों में नोटबंदी के बाद करीब 60 करोड़ रुपये जमा होने का पता चला था। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक 63  खातों की जानकारी मिल चुकी है, जिनमें करीब 165 करोड़ रुपये जमा हुए थे।

बताया गया है कि कई खाते फर्जी आईडी पर खुले हैं। यह संख्या अभी और बढ़ेगी। दूसरी तरफ जिले के सभी बैंक खातों से जुड़ी जरूरी जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध करा रहे हैं। सेक्टर-18 स्थित शाखा ने आयकर विभाग को 23 संदिग्ध खातों की सूची दी है।
विज्ञापन


विभाग ने इनकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक खातों की जांच मुश्किल होती है। एक खाते और उसमें लेनदेन की जानकारी पता लगाने में तीन दिन तक लग जाते हैं। शुरुआती जांच में ही एक्सिस बैंक में सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई थी, जिसमें दिल्ली के पीतमपुरा निवासी नंदू पासवान कई बार बैंक में आता-जाता दिखा है।

वहीं पूछताछ में नंदू ने इस बात से इनकार किया। यह वहीं नंदू पासवान है, जिसके खाते में करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला था। नंदू पीतमपुरा में केबल कारोबारी अन्नू के पास 2012 से काम कर रहा था।

फर्जी आईडी के आधार पर नंदू का चालू और बचत खाता खुलवाया गया था। उसके खाते हिमांशी इंटरप्राइजेज के नाम से खोले गए थे और उसी को प्रोपराइटर बनाया गया था। मामले को जांच ईडी भी कर रही है। 

18 लाख रुपये के नए नोट सीज 
सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में बिशनपुरा गांव के पास एक कार से बरामद 18 लाख रुपये की नई करेंसी और 16 हजार रुपये के पुराने नोट सीज कर दिए गए हैं। आयकर विभाग के मुताबिक कार में सवार जींद (हरियाणा) निवासी जिन तीन युवकों  से यह रकम मिली थी, वे यह नहीं बता पाए कि उनके पास करेंसी कहां से आई थी। इसलिए रकम को सीज कर दिया गया। रकम का डिमांड ड्राफ्ट बनाकर कानपुर स्थित आयकर विभाग मुख्यालय के अकाउंट में जमा होगा। वहीं 18 लाख के मामले की आगे की जांच ईडी करेगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें