उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की सेहत का हाल अब रियल टाइम में मुख्यालय तक पहुंचेगा। स्वास्थ्य महकमा फील्ड में तैनात एएनएम को टैबलेट देने की तैयारी में है, जबकि आशा हेल्थ वर्कर के लिए सीयूजी मोबाइल कनेक्शन मिलेगा।
यही नहीं जिलों को ऑनलाइन जोड़ने के लिए वीडियो डाटा लिंक स्थापित होगा, जिससे आपदा की स्थिति में ऑनलाइन वीडियो कान्फ्रेंसिंग और डाटा शेयरिंग हो सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत यह प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है, जिसपर इसी माह स्वीकृति मिल सकती है।
मानसून, चार धाम और आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के हालात पर निगरानी रखने के लिए विभाग नेटवर्किंग को मजबूत करने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिशन निदेशक नीरज खैरवाल ने चालू वित्तीय वर्ष के केंद्र को भेजे 85 करोड़ के अनुपूरक प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन प्लान (एसपीआईपी) में आनलाइन नेटवर्र्किंग, डाटा ट्रांसफर और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के साथ कनेक्टिविटी सुधारने के प्रस्तावों को तरजीह दी है।
एसपीआईपी में लगभग तीन करोड़ से 2300 हैंडहेल्ड डिवाइज (टैबलेट) खरीदे जाने हैं। यह डिवाइज एएनएम को दिए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य के आंकड़े, टीकाकरण, जच्चा-बच्चा सेहत की प्री और पोस्ट नेटल केयर का डाटा मेनटेन करने के साथ उनको रियल टाइम पर अपने पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
एनएचएम के स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी के लिए 13 जनपदों में वीडियो कान्फ्रेंसिंग नेटवर्क स्थापित होगा, इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रदेश में मौजूदा 139 एंबुलेंस नेटवर्क सुधारने के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये से 32 नई एंबुलेंस खरीदने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
गठित होगा आशा कल्याणकारी कोष
प्रदेश की 11692 आशाओं के लिए आशा कल्याण कोष स्थापित करने का प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है। झारखंड की तर्ज पर यह व्यवस्था यहां भी बनाई जा रही है।
आशाओं के किसी दुर्घटना में गंभीर चोट आने या मौत पर इस कोष का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी शुरूआत साढ़े नौ लाख रुपये से होगी। आशाओं को आईवीआर पर आधारित मोबाइल बेस्ड सिस्टम किलकारी के लिए सीयूजी कनेक्शन दिया जाएगा।