नोबेल पुरस्कार विजेता अंग्रेजी लेखक मोरिस मेटर लिंक की किताब ब्ल्यू बर्ड का हिंदी अनुवाद गोपालदास नीरज और गुजराती साहित्यकार कुंदनिका कपाड़िया ने किया था। हिंदी में ये किताब भारत प्रकाशन मंदिर से प्रकाशित की गई थी। जिसे नील विहग नाम दिया गया। लगभग 55 वर्ष पहले इस किताब की कीमत मात्र एक रुपये थी।
बड़े रचनाकारों का रहा साथ
यहां पर हजारी प्रसाद द्विवेदी, गोवर्धन नाथ शुक्ला, अंबा प्रसाद सुमन, कैलाश चंद्र भाटिया, रवींद्र भ्रमर, श्रीकृष्ण सहाय सहित कई प्रमुख साहित्यकारों का आना जाना रहा। गोपाल दास नीरज, बनारसी दास चतुर्वेदी, नवाब सिंह चौहान, हरवंश लाल शर्मा, डा. मनोहर लाल गौड़, डा. प्रेम स्वरूप गुप्ता, गोवर्धन नाथ शुक्ल, कुंदन लाल उत्प्रेती और रांगेय राघव की साहित्य एवंअन्य रचनाएं यहां से प्रकाशित हुई हैं।
सफर एक नजर में
1-2000 से अधिक किताबों का प्रकाशन हुआ और उत्तर प्रदेश सरकार की पहली से आठवीं तक, यूपी बोर्ड की नौवीं से बारहवीं की किताबें प्रकाशित होती रहीं।
2-1955 के आसपास इसका पंजीकरण नवीन चंद्र निधीश ने कोलकाता से कराया था। 1968 में इसका पंजीकरण रजिस्ट्रार चिट फंड कार्यालय आगरा से कराया गया।
3-इसकी प्रेस रघुवीर पुरी में लगाई गई थी, जिसमें 20, ओपीआई सहित कई मशीनें थीं, ये अलीगढ़ की शुरुआती प्रेस था, जिसे वर्ष 2006 में बंद करा दिया गया था।