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नीरजा भनोट अवार्ड से मजबूत हुई ‘आशा’

Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
Chandigarh
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चंडीगढ़। नीरजा भनोट पैन एम ट्रस्ट की ओर से रविवार को यूटी गेस्ट में आयोजित समारोह में अजमेर की साहसिक महिला आशा मनवानी को नीरजा भनोट अवार्ड 2012 से नवाजा गया। भारतीय थल सेना के पूर्व अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने उनको यह पुरस्कार प्रदान किया। इस पुरस्कार के अंतर्गत उन्हें डेेढ़ लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और एक ट्राफी प्रदान की गई।
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यूटी गेस्ट हाउस में आयोजित समारोह के दौरान जनरल वीपी मलिक ने कहा कि नीरजा देश की महिलाओं के लिये एक आदर्श बन गई हैं। नीरजा भारतीय सेना में होती तो उन्हें देखकर सभी में जोश भरा रहता।
इस मौके पर आशा मनवानी ने कहा कि यह पुरस्कार लेते हुए उन्हें बेहश खुशी हो रही है क्योंकि यह पुरस्कार नीरजा की बहादुरी का प्रतिनिधित्व करता है। 55 वर्षीय आशा ने पति के छोड़ने और धोखे से दूसरी शादी करने के बाद महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत बनीं। अब वे दूसरी महिलाओं के हकों के लिए भी आवाज उठा रही हैं। ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी रमा भनोट ने आशा मनवानी का अभिनंदन किया। ट्रस्ट के ट्रस्टी इरफान खान ने कहा कि ट्रस्ट नीरजा के सिद्धांतों के प्रसार में प्रयासरत है। इस अवसर पर नीरजा के पिता हरीश भनोट को भी याद किया गया। यहां मौजूद नीरजा के भाई अखिल भनोट ने हरिंदरनाथ चट्टोपाध्याय की कविता पेश की। यहां सुबह वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसके विजेताओं को डा. रंजना मलिक ने पुरस्कृत किया। दस हजार रुपये के प्रथम पुरस्कार पर भवन विद्यालय का कब्जा हुआ, जबकि माउंट कार्मल दूसरे और सेक्रेड हार्ट स्कूल तीसरे स्थान पर रहा।
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नीरजा की बहादुरी को सलाम
नीरजा भनोट अवार्ड वर्ष 1990 में नीरजा भनोट की याद में शुरू किया गया था। नीरजा 1986 में कराची एयरपोर्ट पर हाईजैक हुए पैन एम प्लेन में यात्रियों को बचाते हुए शहीद हो गई थीं।
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