करहीभदर गांव के ग्रामीणों ने गुरुवार को गांव में शराब की दुकान खुलने में लेट-लतीफी होने पर चौपाल लगाकर हंगामा किया। इस दौरान तहसीलदार, थाना प्रभारी और आबकारी आधिकारी भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने अधिकारियों की जमकर फटकार लगा दी। ग्रामीणों के सामने अधिकारी बेबस नजर आए। इसके बाद एसडीएम और पुलिस विभाग के एसडीओपी ने मौके पर पहुंचकर आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
सरपंच लीला राम डडसेना ने बताया कि ग्राम करहीभदर के ग्रामीणों ने शराब दुकान खोले जाने की मांग की थी। उन्होंने इस बात का हवाला दिया था कि गांव में जगह-जगह अवैध शराब बिकती है, जिसके बाद यहां प्रदेश के आबकारी आयुक्त ने दुकान खोलने के लिए 11 अगस्त को आदेश जारी किया। दुकान के लिए जमीन चयनित की गई और निर्माण कार्य के लिए भूमिपूजन भी किया गया। इसके बाद शराब दुकान खोलने के प्रक्रिया को रोक दिया गया। अधिकारी कुछ कहते हैं और नेता कुछ और कहते हैं। इसीलिए ग्रमीणों ने हंगामा किया है। अधिकारियो से बैठक के बाद ग्रामीण शांत हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, करहीभदर गांव के सैंकड़ों ग्रामीण शराब दुकान मामले को लेकर कलेक्ट्रेट जाने वाले थे, लेकिन एसडीएम ने खुद गांव आने की बात कही तो ग्रामीण गांव में ही रुक गए। तहसीलदार आधकारी, उप निरीक्षक और थाना प्रभारी से बात नहीं बनी थी, जिसके बाद आबकारी के जिला अधिकारी आए वो भी जवाब नहीं दे पा रहे थे। एसडीएम और एसडीओपी ने पूरा मामला संभाला। पहले आबकारी विभाग ने शराब खोलने का आदेश दिया, फिर अचानक स्टे लगा दिया जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी विभाग वाले पहले पकड़ते हैं, फिर शराब कोचियों से महिना वसूलते हैं।