छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले स्थित एसईसीएल भटगांव की काफी पुरानी दुग्गा ओपन कास्ट माइंस में अवैध कोयला खनन के दौरान चट्टान का बड़ा हिस्सा गिरने से सुरंग के अंदर ग्रामीण फंस गया। देर शाम तक भी ग्रामीण को सुरंग से रेस्क्यू टीम के द्वारा बाहर नहीं निकाला जा सका है।
एसईसीएल भटगांव क्षेत्र में बहुत पुरानी माइंस विगत एक दशक से फारेस्ट क्लेरेंस नहीं मिलने की वजह से प्रबंधन के द्वारा बंद कर दिया गया था। जिसके बाद से अवैध कोयले का उत्खनन ग्रामीणों के द्वारा लगातार पुलिस की साठ-गांठ में किया जा रहा है। जिससे अभी तक एक दर्जन से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद प्रशासन व प्रबंधन के हरकत में आने के बाद सुरंग को जेसीबी व ब्लास्टिंग कर ध्वस्त भी किया जा चुका है। उसके बाद भी ग्रामीण दूसरी जगह नई सुरंग खोद कोयला उत्खनन शुरू कर देते हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर सोमवार की सुबह से ग्रामीणों के द्वारा सुरंग में घुसकर कोयला खोदाई की जा रही थी।
जिसमें बताया जा रहा है कि दोपहर तक तीन ग्रामीणों को छोड़ उक्त कार्य में लगे अन्य ग्रामीण अपना-अपना कोयला निकालकर वहां से चले गए। वहीं तीन ग्रामीणों के द्वारा कोयला खोदने का काम किया जा रहा था। जिसमें सरगांव अम्बिकापुर निवासी शिव बरवा सुरंग के अंदर घुस कर कोयला का खोदाई कर रहा था। तो वहीं अन्य दो ग्रामीण कोयला को भरकर बाहर निकालने का काम कर रहे थे। इसी बीच सुरंग का सामने का हिस्सा अचानक से गिर गया। जिससे उसके अंदर खोदाई कर रहे शिव बरवा फंस गया।
वहीं घटना देख दोनों ग्रामीण वहां से फरार हो गए। इसके बाद इन्होंने मामले की जानकारी शिव के घर वाले को दी। जिसके बाद परिजनों ने भटगांव थाने पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी सरफराज फिरदौसी अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मौके का मुआयना करते हुए रेस्क्यू टीम को बुलाकर रेस्क्यू शुरू कर दिया, लेकिन देर शाम तक रेस्क्यू की टीम के द्वारा चट्टान को खाली नहीं कराया जा सका। जिसके कारण सुरंग के अंदर फंसे ग्रामीण को बाहर नहीं निकाला जा सका है। वहीं अंधेरा होने के बाद रेस्क्यू एवं पुलिस की टीम वापस आ गई है। वहीं दूसरे दिन रेस्क्यू करके सुरंग के अंदर फंसे शिव को बाहर निकलना जाने की बात सामने आ रही है।
चोरी रोकने को प्रबंधन ने कई प्रयास किए
बंद पड़ी माइंस से कोयला चोरी को रोकने के लिए एसईसीएल प्रबंधन के द्वारा पूरे माइंस के चारों ओर बड़ी-बड़ी दीवारें बना दी हैं। वहीं कई बार अवैध सुरंग को पुलिस की मौजूदगी ध्वस्त भी किया गया है। परंतु ग्रामीण तमाम प्रयासों को दरकिनार कर जान जोखिम में डालकर कोयला के अवैध उत्खनन को अपनी रोजी रोटी मान कर रहे हैं।