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'कभी रोटेशनल सीएम की बात नहीं कही': सिंहदेव बोले- लेकिन एक दिन की भी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण, देर आए दुरुस्त आए

Thu, 29 Jun 2023 01:29 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला चुनावों से कुछ महीने पहले ही आया है। कई महीनों से सीएम बघेल के साथ खींचतान में फंसे सिंहदेव को डिप्टी सीएम नियुक्त करने का कांग्रेस का कदम राज्य इकाई में अंदरूनी कलह को रोकने और साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार करने का एक प्रयास प्रतीत होता है।
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टीएस सिंहदेव मीडिया से बात करते हुए। (सांकेतिक फोटो) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि, उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री पद के रोटेशन पर 'समझौते' की बात नहीं की थी। दावा किया कि यह सब मीडिया की बनाई चर्चा थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि, एक दिन के लिए भी मिली जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। सिंहदेव गुरुवार सुबह दिल्ली से रायपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात कर रहे थे। उन्हें कांग्रेस ने एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ का डिप्टी सीएम बनाए जाने की घोषणा की थी। सिंहदेव ने पार्टी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि, देर आए दुरुस्त आए। 

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हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी
रायपुर एयरपोर्ट पर सिंहदेव के पहुंचने पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत करते हुए टीएस बाबा जिंदाबाद के नारे लगाए। ढाई-ढाई साल के सत्ता-साझाकरण समझौते के बारे में पूछे जाने पर सिंहदेव ने कहा कि मैंने कभी भी किसी ढाई-ढाई साल के समझौते पर चर्चा नहीं की। यह मीडिया में चर्चा थी। हालांकि, मैं मीडिया से हमेशा सकारात्मक सहयोग मिला। उन्होंने कहा, कि आज आलाकमान ने निर्णय लिया है। चाहे वे ढाई साल में निर्णय लें या पहले दिन या भविष्य में, हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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सीएम चेहरे पर बोले- हम आलाकमान के फैसले का पालन करते हैं
आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के (मुख्यमंत्री पद के) चेहरे को लेकर किए गए सवाल पर सिंहदेव ने कहा कि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं। आम तौर पर मुख्यमंत्री पद का चेहरा और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष को चुनाव के दौरान सबसे आगे रखा जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि हम एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं। पिछली बार भी हमने ऐसा ही किया था। एक व्यक्ति अकेले चुनाव नहीं लड़ सकता और जीत सुनिश्चित नहीं कर सकता। पिछली बार पीसीसी अध्यक्ष के तौर पर बघेल सबसे आगे थे. इस बार वह सीएम हैं। उन्होंने कहा, हम आलाकमान के फैसले का पालन करते हैं।

विधानसभा में 60 सीटें मिलीं तो भी संतुष्ट
विधानसभा की 90 सीटों में से कितने पर कांग्रेस को जीत की उम्मीद है? इस पर सिंहदेव ने कहा कि मेरे लिए, लक्ष्य दो-तिहाई और 75 प्लस के बीच है। दो-तिहाई का लक्ष्य, जिसका मतलब है 60 सीटें। एक यथार्थवादी लक्ष्य प्रतीत होता है। हमारे सहयोगी 75 से अधिक सीटों के बारे में बात कर रहे हैं। सिंहदेव ने कहा कि उनके पास वर्तमान में 71 सीटें हैं और 75 प्लस का लक्ष्य बहुत दूर नहीं है। यह भी कहा कि, लेकिन, अगर हमें 60 सीटें मिलती हैं तो भी हम संतुष्ट होंगे। आत्मविश्वास होना चाहिए, अति आत्मविश्वास नहीं।

विधानसभा चुनाव से जुड़े कुछ आंकड़े

  • 2018 में, कांग्रेस ने राज्य की 90 में से 68 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 साल लंबे शासन का अंत हुआ, जो 15 सीटें जीतने में सफल रही।
  • जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था और क्रमशः पांच और दो सीटें हासिल की थीं।
  • बाद में राज्य में कुछ उपचुनावों के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस की ताकत 71 हो गई।
  • वर्तमान में, भाजपा के पास 13 विधानसभा सीटें, जेसीसी (जे) के पास तीन और बसपा के पास दो सीटें हैं। हाल ही में एक बीजेपी विधायक का निधन हो गया और सीट खाली है।

सिंहदेव की नियुक्ति को एकजुटता के रूप में दिखाने का प्रयास

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विधानसभा चुनावा में विपक्षी भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। उन्होंने सिंहदेव की नियुक्ति की सराहना की है। इसे एकजुटता के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। दरअसल, सिंहदेव और बघेल के बीच सत्ता संघर्ष ने पिछले साल एक नया मोड़ ले लिया था। सिंहदेव ने पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग यह संकेत देते हुए छोड़ दिया कि उन्हें सरकार में दरकिनार कर दिया गया था। हालांकि उनके पास चार अन्य विभाग बने रहे। सरगुजा शाही परिवार से वशंज सिंहदेव अभी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीस सूत्री कार्यान्वयन और वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग संभाल रहे हैं।

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