छत्तीसगढ़ में सत्ता में वापसी का कांग्रेस का सपना फिर हकीकत में नहीं बदल पाया। बस्तर ने इस बार पार्टी को सपना पूरा करने का मौका जरूर दिया था, मगर महासमुंद ने कांग्रेस की जीती बाजी को फिर हार में बदल दिया और भाजपा को जीत दिला दी।
इस संसदीय सीट पर भाजपा ने जबर्दस्त प्रदर्शन कर न केवल बस्तर में हार की भरपाई की, बल्कि पांच मंत्रियों की हार के बाद भी भाजपा के हैट्रिक के सपने पर ग्रहण नहीं लगने दिया।
गत विधानसभा चुनाव में राज्य में रमन सरकार की सत्ता बरकरार रखने वाले बस्तर क्षेत्र ने इस बार रमन सरकार की विदाई का रोडमैप तैयार कर दिया था।
इस बार नहीं चली रमन की 'आदिवासी एक्सप्रेस'
बीते चुनाव में इस क्षेत्र की 12 में से 11 सीटें हासिल करने वाली भाजपा इस बार यहां महज चार सीट ही हासिल कर पाई।
प्रथम चरण के अंतर्गत इस क्षेत्र में पड़े वोट के बाद से ही रमन सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। मगर इस बार महासमुंद ने बस्तर वाली भूमिका निभा कर भाजपा की हैट्रिक पूरा करने का सपना साकार कर दिया।
दरअसल आठ विधानसभा सीटों वाले इस संसदीय क्षेत्र में पिछली बार महज एक सीट हासिल करने वाली भाजपा ने इस बार छह सीटें हासिल की।
एक सीट पर भाजपा का बागी उम्मीदवार जीता। बीते चुनाव में यहां सात सीटें जीतने वाली कांग्रेस महज एक सीट ही हासिल कर पाई।
अंत में महासमुंद संसदीय क्षेत्र के परिणामों ने ही कांग्रेस की उम्मीदों पर तुषारापात कर दिया। राज्य के मैदानी इलाकों के अन्य संसदीय क्षेत्रों की विधानसभा सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन कमोबेश पहले जैसा ही रहा।
सरकार के पांच मंत्रियों को करारी हार का सामना करना पड़ा तो ज्यादातर विधायकों को टिकट देने का फैसला भी गलत साबित हुआ। महासमुंद की 8 में से 6 सीटों पर मिली जीत ने बाजी पलट दी वरना बस्तर ने रमन सरकार का निपटारा कर दिया था।