उसकी आंखों में थे शादी के सुनहरे सपने, उसके हाथों में थी मेहंदी और जिस्म पर था दुल्हन का लिबास लेकिन उसके होश उड़ गए जब उसने दूल्हे के लड़खड़ाते कदमों को देखा।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली रोशनी यूं तो दसवीं तक पढ़ी है लेकिन एक शराबी के साथ उसका भविष्य क्या हो सकता है ये उसने अच्छे से भांप लिया।
रोशनी के पिता रामशरण यादव जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में चपरासी हैं। उन्होंने भी अपनी बेटी की भावनाओं को समझा और बारात को हाथ जोड़कर वापस कर दिया।
जब दूल्हा मंडप में लड़खड़ाते हुए पहुंचा तो रोशनी के होश उड़ गए, सारे हसीन सपने मानो टूट गए और वो घबरा गई। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और शादी से इंकार कर दिया।
रोशनी के इस फैसले के परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को नाराज कर दिया और बारात का मूड भी उखड़ गया लेकिन साहसी रोशनी का साथ दिया उसके पिता ने। उन्होंने अपनी बेटी के फैसले पर मुहर लगाई और बारात को हाथ जोड़कर वापस कर दिया।