फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dhamtari : देव उठनी एकादशी पर यूपी-बिहार से पहुंची गन्ने की खेप, पर इस बार दोगुना हुआ दाम

Fri, 04 Nov 2022 05:47 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी

सार

यूपी से गन्ना लेकर बेचने पहुंचे व्यापारियों ने बताया कि वे इसे 80-90,100 रुपए जोड़ी तक बेच रहे हैं। जबकि सिंघाड़ा 100 रुपए किलो और शंकरकंद 40 से 50 रुपए किलो बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि इस साल गन्ने के रेट में बढ़ोतरी हुई है। 
विज्ञापन
देवउठनी एकादशी पर यूपी-बिहार से बिकने के लिए पहुंचे गन्ने। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छत्तीसगढ़ के धमतरी में शुक्रवार को देव उठनी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसे देव दीपावली भी कहते हैं। ऐसे में एक बार फिर दिवाली के बाद बाजारों में रौनक लौट आई है। पूजन के लिए यूपी और बिहार से गन्ने की बड़ी खेप जिले के बाजारों में पहुंची है, लेकिन इस बार महंगाई की मार भी है। बाजार में गन्ना 80 से 100 रुपए में मिल रहा है। जबकि पिछली बार इसके दाम 40 से 60 रुपए थे। 

विज्ञापन


कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने का शयनकाल पूरा करने के बाद जागते हैं। इसी दिन तुलसी विवाह भी होता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और लोग व्रत कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। 

विज्ञापन


घर-घर पूजन के लिए एक दिन पहले से ही बाजारों में रौनक बढ़ गई थी। पूजा के लिए लोग गन्ना और सिंघाड़ा लेने पहुंचे। हालांकि बाजार में इस बार महंगाई का ज्यादा असर है। यूपी से गन्ना लेकर बेचने पहुंचे व्यापारियों ने बताया कि वे इसे 80-90,100 रुपए जोड़ी तक बेच रहे हैं। जबकि सिंघाड़ा 100 रुपए किलो और शंकरकंद 40 से 50 रुपए किलो बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि इस साल गन्ने के रेट में बढ़ोतरी हुई है। 
विज्ञापन




गणेश मंदिर के पुजारी रघुवीर पांडेय बताते हैं कि एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है। वह बताते हैं कि देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह भी होता है। मान्यता है कि वृंदा को तुलसी के रूप में सदैव हरा-भरा रहने और शालिगराम के साथ निभाने का वरदान मिला है। इसलिए लोग विधि विधान से घर आंगन में तुलसी विवाह रचाते हैं। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें