प्रवचन करते कथावाचक आचार्य झम्मन शास्त्री
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राजधानी रायपुर में आयोजित शिव मानस कथा महोत्सव के पहले दिन कथावाचक आचार्य झम्मन शास्त्री ने रुद्राभिषेक, गोपाल सहस्त्रनाम, शिव सहस्त्रनाम और पूजन आराधना का महत्व बताया। मलमास और पुरुषोत्तम मास का भी महत्व बताया। उन्होंने बताया कि सत्संग का अवसर भगवान की कृपा से ही मिलता है। भगवान श्रीराम भी कथा सुना करते थे। संस्कृति प्रधान समाज के लिए कथा का आयोजन होना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि आज के युग में भौतिक विकास से भारतीय संस्कृति का धीरे-धीरे पतन होते दिख रहा है। परिवारों में दूरियां बढ़ रही हैं। संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं और एकांकी परिवार बढ़ते जा रहे हैं। अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए उन्हें सुबह में सूर्योदय के बाद सूर्य को अर्घ्य देना सिखाएं।
विप्र महिला मंडल की महाराज ने की तारीफ
इस दौरान शक्ति छत्तीसगढ़ विप्र महिला समाज ब्राह्मणपारा ने अपनी महती भूमिका निभाई। प्रीति शुक्ला, संरक्षिका कुसुम शर्मा, महिला मंडल के अन्य महिलाओं ने सबसे पहले आचार्य का स्वागत किया। इसके बाद मानस कथा शुरू हुई। कथावाचक शास्त्री ने विप्र महिला मंडल की जमकर तारीफ की। अपने श्री वचनों से प्रवचन देकर श्रद्धालुओं को अनुग्रहित किया। पंडित शास्त्री करीब 27 साल से ब्राह्मणपारा में कथा का प्रवचन करते आ रहे हैं।
व्रत के महत्व पर डाला प्रकाश
उन्होंने व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि व्रत हमारी आंतरिक शुद्धि करता है। अभिभावकों से कहा कि अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए उन्हें सूर्योदय में उठकर सूर्य को अर्घ्य देना सिखाएं। शिव मानस कथा महोत्सव के तहत सुबह 9 बजे महिला मंडल ने सर्वप्रथम रुद्राभिषेक का आयोजन किया। दोपहर में भजन कीर्तन की बयार बही। आचार्य के कथा प्रवचन के बाद आरती और प्रसाद का वितरण किया गया।