छत्तीसगढ़ के किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना से खेती-किसानी में बढ़ावा मिला है। इससे किसानों के स्थिति में बदलाव आया है। इस योजना से किसानों को अब तक 20 हजार 103 करोड़ रुपए सब्सिडी दी गई है। आज 20 अगस्त को किसानों को दूसरी किश्त के रूप में 1810 करोड़ रुपए जारी किए गए गए हैं। इससे मिलाकर इस योजना के तहत 21,913 करोड़ रुपए हो जाएंगे। किसानों पर बकाया 9270 करोड़ रुपए की कर्जमाफी और 350 करोड़ रुपए के सिंचाई का भी छत्तीसगढ़ सरकार ने माफ किया है।
छत्तीसगढ़ में साल 2018-19 में पंजीकृत धान का रकबा जो 25.60 लाख हेक्टेयर था, जो बढ़कर 32 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। इस समय पंजीकृत किसानों की संख्या 16.92 लाख से बढ़कर 26 लाख हो गई है। इन 5 सालों में किसान इसका अंदाजा सिर्फ राज्य में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान की साल दर साल बढ़ती मात्रा से आसानी से लगाया जा सकता है। प्रदेश में खरीफ विपणन साल 2018-19 में 80.30 लाख टन, साल 2019-20 में 83.94 लाख टन, साल 2020-21 में 92.06 लाख टन, साल 2021-22 में 98 लाख टन और साल 2022-23 में 107 लाख टन के रिकार्ड खरीदी समर्थन मूल्य हुई है।
कोदो-कुटकी और रागी के लिए सब्सिडी
राज्य में कोदो, कुटकी और रागी के उत्पादक किसानों को योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से 9 हजार रूपए सब्सिडी दी जा रही है। राज्य में बीते दो सालों से कोदो, कुटकी-रागी की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है। साल 2021-22 में 54 हजार क्विंटल कोदो, कुटकी, रागी की खरीदी कर किसानों को इसके एवज में 16 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। साल 2022-23 में 40 हजार क्विंटल खरीदी की गई है। इसका मूल्य 12 करोड़ रुपए है।
नरवा, गौठान योजनाओं से लोग लाभवंतित
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत धान के बदले अन्य फसलों की खेती या वृक्षारोपण करने वाले किसानों को 3 साल तक 10 हजार रूपए प्रति एकड़ सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योजना ने भी राज्य में खेती-किसानी को काफी हद तक मजबूती दी है। गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत गोबर की खरीदी और उससे 37 लाख क्विंटल कम्पोस्ट के उत्पादन और उपयोग से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और खेती-किसानी समृद्ध बनाने में मददगार साबित हो रही है।