चर्चा करते नीतिन लॉरेंस और रूपिका लॉरेंस
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Raipur Salem School Conversion Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सालेम इंग्लिश स्कूल में हिंदू कर्मचारियों पर धर्मांतरण का दबाव मामले में छत्तीसगढ़ डायसिस ऑफ बोर्ड एजुकेशन के वाइस प्रेसिडेंट नितिन लॉरेंस और स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रुपिका लॉरेंस ने इस मामले में पलटवार किया है। नितिन लॉरेंस ने कहा कि धर्मांतरण को लेकर कुछ कर्मचारियों ने जो आरोप लगाये हैं। इसके पीछे एक बड़ी साजिश है। इन लोगों के पीछे एक गहरी चाल है। इसमें अरुण पन्नालाल, अतुल ऑर्थर और कुछ टीचर्स भी मिले हुए हैं, क्योंकि 27 मार्च को डायसिस की गवर्नर बॉडी का चुनाव हुआ था। इन लोगों ने सात महीने तक स्कूल पर कब्जा किए हुए थे। ढाई से तीन करोड रुपए इन्होंने स्कूल से निकाल लिए हैं, जिस पर हमने एक कमेटी का गठन किया है। उससे बचने के लिए ये लोग धर्मांतरण का आड़ ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप लगाकर मुझे बदनाम किया जा रहा है। कुल मिलाकर ध्यान भटकने की कोशिश है। इस मामले पर मैनेजमेंट कभी पीछे नहीं हटेगा और जांच कराई जाएगी। स्कूल के पैसे का हेर-फेर हुआ है। गलत गतिविधियों में जो पैसे लगाए गए हैं, उसकी जांच कराई जाएगी। पुलिस की आड़ में धर्मांतरण कानून का सहारा लिया जा रहा है। एक महीना पहले इन्हीं कर्मचारियों ने थाने में जातिसूचक कंपलेन किया था पर जांच के बाद कुछ नहीं मिला। अब धर्मांतरण का कार्ड खेलकर मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। यह लोग स्कूल में काम करना नहीं चाहते हैं, स्कूल से नदारद रहते हैं। रही बात पीएफ की, तो इन सभी का पीएफ जमा है।
लॉरेंस ने सैलरी को लेकर कहा कि जो पहले के प्रिंसिपल थे, वो इसके लिये जिम्मेदार हैं। इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। हम तो चुनाव जीतने के बाद चार्ज लिए हैं, इसमें हमारा कहीं पर भी कोई भूमिका नहीं है। मुझे और संस्था को बदनाम करने के लिए इस तरह की साजिश रची जा रही है। कुल मिलाकर बड़ी जांच से बचने की कोशिश की जा रही है। हमारी संस्था संविधान के हिसाब से चलती है। एलिमिनेट से कार्य कराए जाते। यह संस्था न धर्मांतरण कराती है और ना करायेगी। ऐसे लोगों को श्रेय नहीं दिया जाता है।
दूसरी ओर सालेम इंग्लिश स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रूपिका लॉरेंस ने कहा कि आरोप लगाने वालों का कहना कि वह 30-40 वर्ष से यहां पर नौकरी कर रहे हैं जबकि मैं यहां पर नवंबर 2023 से कार्यरत हूं। पिछले तीन साल में तो इन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा और जब डायसिस का चुनाव हो गया और हमारी गवर्निंग बॉडी गठित हो गई तब बड़ी जांच को छुपाने के लिए इस तरह की छोटी राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। आप जब भी हमारे चर्च में आएंगे तो वहां पर लोग लाइन लगाकर खड़े रहते हैं मेंबरशिप के लिए। मेंबरशिप लेने के लिए लोग तीन साल तक वेट करते हैं। बहुत मुश्किल से मेंबरशिप मिल पाती है। जो लोग स्कूल नहीं आ रहे हैं और एक जगह पर बैठे हुए हैं तो यह कोड ऑफ कंडक्ट में आता है। आप कोई भी गलत बयान नहीं दे सकते क्योंकि संस्था में केवल बड़े लोग ही काम नहीं कर रहे हैं छोटे व्यक्ति भी काम कर रहे हैं। कोड आफ कंडक्ट के तहत इन पर कार्रवाई की जाएगी।