Amar Ujala Exclusive Investigation; Sai City Sankara, Amleshwar: तिनका तिनका, पाई-पाई रुपए जोड़कर लोग अपना आशियाना बनाने का सपना देखते हैं। इसके लिए दिन-रात मेहनत कर अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई की जमा पूंजी से अपने सपनों का आशियाना खरीदते हैं। लेकिन जब वह मकान उनके मन मुताबिक न मिले, उनके साथ घोखा और विश्वासघात हो, तो सोचिये उनके ऊपर क्या गुजरती होगी। कुछ ऐसा ही हुआ है रायपुर के पास सांकरा अम्लेश्वर स्थित साईं सिटी के रहवासियों के साथ। आरोप है कि इस कॉलोनी को बसाने वाले प्लॉट ऑनर और बिल्डर ने सुनहरे सब्जबाग दिखाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी की है।
इस संबंध में कॉलोनीवासियों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीओ) पाटन जिला दु्र्ग में शिकायत कर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं पीडब्ल्यूडी पाटन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पाटन, राज्य विद्युत मंडल अम्लेश्वर और रेरा में भी शिकायत की गई है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि यहां पर प्लॉट बेचने और मकान बनवाने के नाम पर उनके साथ लाखों रुपय की ठगी की गई है। बिल्डर कौस्तुभ मिश्रा ने लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा लेकर फरार हो गया है। लोगों के आधे-अधूरे मकान छोड़कर अंडरग्राउंड हो गया है। लोग अपने मकान और मूलभूत सुविधाओं के लिये दर-दर भटक रहे हैं। आधे-अधूरे मकानों को बनाकर बिल्डर गायब है। जबकि मकान लेने के दौरान प्लाट ऑनर और बिल्डर ने एग्रीमेंट में सभी मूलभूत सुविधायें देने का वादा किया था।
दिखाये थे सुनहरे सब्जबाग
जब इस कॉलोनी को 13 साल पहले वर्ष 2011 में जब बसाया जा रहा था तब कॉलोनी के प्लॉट ऑर्नर बैरनबाजार रायपुर निवासी शरद अग्रवाल और उनके साथ पार्टनरशिप में काम कर रहे तीन से चार लोगों ने कॉलोनी कैंपस में मकान के साथ ही सभी मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, सड़क, नाली, पानी , गॉर्डन, मंदिर, बाउंड्रीवॉल आदि बनाकर देने का वादा किया गया, लेकिन अभी तक कॉलोनी में पूरी तरह से सड़क नहीं बन पाई है जो बनी है, वह भी आधी-अधूरी है। सड़कों में दरारें आ गई हैं। कई जगह से जर्जर हैं। इन दरारों में बरसात के समय सांप और बिच्छू के आने से लोगों के जान का खतरा बना रहता है। अभी तक कॉलोनी में पूरी तरह से सड़क और नाली नहीं बन पाई है। इस कॉलोनी को तीन चरणों में यानी फेस वन, फेस टू और फेस 3 के तहत बसाया जा रहा है, लेकिन अभी सिर्फ फेस वन में ही आधा-अधूरा निर्माण करके छोड़ दिया गया है।
कॉलोनी में कई जगह कच्ची सड़क है। लोग खुद ही अपने घरों के पास नाली का निर्माण कराए हैं। पूरी तरह से बिजली के खंभे नहीं लगाए गए हैं। लोग जगह-जगह बांस के सहारे अपने घरों तक बिजली के तार खींचे हैं। फेस फेस टू और थ्री में नाली नहीं बनाने से इन कच्ची नालियों में पानी बज बजा है, जिससे बीमारी होने का खतरा है। कई जगह लिंकिंग रोड में गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जिससे रात में लोगों के आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग तो इन गड्ढों में गिरकर हादसे का शिकार भी हो चुके हैं।
मूलभूत सुविधाओं को तरसते लोग
कैंपस में कुछ जगहों पर बाउंड्रीवॉल करके बाकी जगह ऐसे ही तार की फेंसिंग कर छोड़ दिया गया है। इस वजह से कैंपस में अराजक तत्वों का खतरा बना रहता है। लोग भय के साए में जी रहे हैं। अभी तक कॉलोनी में मंदिर, गार्डन और पानी टंकी नहीं बन पाये हैं। जिस वजह से लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ लोग खुद आपस में मिलकर पाइप लाइन बिछाए हैं, जो पानी टंकी बैठाई गई है उससे लोग किसी तरह से पानी ले रहे हैं वहीं कुछ लोग खुद का यहां पर बोर भी करवाए हैं। बिल्डर कौस्तुभ मिश्रा ने लगभग 13 लाख रुपए में घर बनाकर देने का वादा किया था। वह लोगों से रुपए लेकर और आधा अधूरा मकान बनाकर फरार हो गया है। लोग अपना घर पाने के लिए न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
एनओसी लेने के लिए भू-स्वामी ने लगाया आवेदन
सबसे बड़ी और खास बात ये है कि भू-स्वामी शरद अग्रवाल ने फेस-1 में हुए काम को दिखाकर कई सरकारी विभागों से एनओसी लेने के लिए आवेदन लगाया है। उनकी ओर से लगाये गये आवेदन में कहा गया है कि वो कॉलोनी में अंदर और बाहर पानी निकासी, पेयजल, बिजली, खंभा, ट्रांसफारमर, सड़क, मंदिर, गॉर्डन, बाउंड्रीवाल आदि बना दिये गये हैं। अत: उन्हें कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र दिया जाये। भू-स्वामी के खिलाफ कॉलोनोवासियों ने भी इन सरकारी विभागों में आवेदन लगाकर कहा कि अग्रवाल ने सरकारी विभागों को गलत और भ्रामक जानकारी दी है। फेस-1 में जो कार्य होना बताये गये हैं, वो काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसलिये जनहित में उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र न दिया जाये। बताया जाता है कि भू-स्वामी इस एनओसी मिल जाने के बाद बाकी के खाली प्लाट को बेचना चाहता है।
इनका कहना है...
एसडीओ बोले-नोटिस भेजेंगे
इस संबंध में अमर उजाला ने पाटन एसडीओ नीरज से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि लोगों कि शिकायत पर मामले में हमने जांच कर ली है और संबंधित प्लॉट ऑनर शरद अग्रवाल को नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी ।
'जो छापना है, छाप दीजिए'
वहीं प्लॉट ऑनर शरद अग्रवाल से जब अमर उजाला ने उनका पक्ष लेने के लिए फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कैमरे के सामने बाइट देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि कॉलोनी में जो काम बचे हैं। नाली, बिजली, सड़क, बाउंड्रीवाल का उसे भी एक-दो महीने में करा देंगे। शासन-प्रशासन का किसी प्रकार का कोई भय नहीं होने पर फोन पर खुलेआम कहा कि आपको जो छापना है, छाप दीजिए।
बिल्डर ने नहीं दिया कोई जवाब
वहीं बिल्डर कौस्तुभ मिश्रा से अमर उजाला ने फोन पर संपर्क किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला। इस संबंध में उनका पक्ष लेने के लिए उन्हें टेक्सट मैसेज कर छोड़ दिया गया, लेकिन उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
कॉलोनीवासियों ने इस केस से संबंधित सभी दस्तावेज अमर उजाला को उपलब्ध करवाये हैं।
इस तरह के मामले से साफ जाहिर है कि राज्य की विष्णुदेव सरकार में कॉलोनाइजर्स और बिल्डर्स में किसी प्रकार का कोई भय नहीं है। वह खुलेआम इस तरह के कॉलोनी बनाकर लोगों की मेहतन की गाढ़ी कमाई लूटकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं।