छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रदेश महामंत्री ओपी चौधरी ने आज महादेव एप को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। ऑनलाइन सट्टे के जरिए आतंकी फंडिंग की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में खुद आगे आकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए से जांच करवाने के लिए खत लिखना चाहिए। दूसरी ओर उनके इस बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि चौधरी के देश से आतंकियों को फंडिंग वाले आरोप पर पीएम मोदी नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इस्तीफा दें।
चौधरी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसी आशंकाएं है कि दुबई से संचालित महादेव एप को कुख्यात माफिया गिरोह डी-कंपनी का संरक्षण प्राप्त है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आंतकी घोषित माफिया डॉन दाउद के जरिए किस तरह भारत में आतंकियों को फंडिंग की जाती है यह किसी से छिपा नहीं है। दुबई एक इस्लामिक देश का हिस्सा है, जहां जुआ, सट्टा आदि चीजों को अवैध घोषित किया गया है ऐसे में महादेव एप से दुबई में बैठकर हजारों करोड़ रुपए का ऑनलाइन सट्टा बिना किसी अंतर्राष्ट्रीय माफिया गिरोह के सहयोग के संभव नहीं है।
'राज्य सरकार ने युवाओं को जुए और सट्टे के दल-दल में धकेला'
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की भूपेश सरकार युवाओं को जुए और सट्टे की बुराई में धकेल कर सैकड़ों हजारों करोड़ रुपए इकठ्ठे करने वाले महादेव एप के प्रमोटर्स को संरक्षण देती रही है। यह बात ईडी ने विशेष न्यायालय में पेश किए गए अभियोजन पत्र में साफतौर पर लिखा है। दावा करते हुए कहा कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए एएसआई चंद्रभूषण वर्मा ने अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय के शक्तिशाली अधिकारियों और महत्वपूर्ण राजनीतिज्ञों को महादेव एप के संचालकों से वसूले गए करोड़ों रुपए प्रोटेक्शन मनी के रूप में देता रहा है। ईडी ने अपने अभियोजन पत्र में यह भी लिखा कि एडिशनल एसपी रैंक के अफसरों को 65 लाख रुपए महीने एप संचालकों की तरफ से रिश्वत के रूप में दिए जा रहे थे। ऐसी स्थिति में इनसे उच्च स्तर के पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक रूप से शक्तिशाली लोगों को कितना पैसा मिलता होगा इसका अनुमान लगाना बहुत कठिन नहीं है।
'मुख्यमंत्री का आरोप बेतुका और बौखलाहट से भरा'
चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए इससे ज्यादा शर्म की और क्या बात होगी कि एक प्रतिष्ठित सरकारी एजेंसी अदालत को तमाम सबूतों के साथ यह बता रही है कि किस तरह से इस संगठित लूट को मुख्यमंत्री कार्यालय के शक्तिशाली अधिकारी और राजनेता रिश्वत लेकर संरक्षण दे रहे थे।
सीएम भूपेश बघेल के राजनैतिक बदले की भावना से ईडी के जरिये कांग्रेस सरकार को परेशान करने के आरोप पर कहा कि ईडी ने इस मामले में सुपेला पुलिस ने मई 2022 में मामला दर्ज किए जाने के बाद महादेव एप की जांच शुरू की है। ऐसे में मुख्यमंत्री का आरोप बेतुका और बौखलाहट से भरा है। दरअसल, कांग्रेस सरकार और उसकी पुलिस ने महादेव एप के सरगनाओं से और अधिक पैसा ऐंठने की नीयत से दिखावटी कार्रवाई की थी, जिसमें स्थानीय स्तर पर सट्टेबाजी का काम देख रहे इस गिरोह के छोटे-मोटे गुर्गों को बलि का बकरा बनाकर असल चेहरों को बचाया जा सके। छत्तीसगढ़ के गरीब और भोले भाले युवाओं को ऑनलाइन जुए की लत लगाकर संगठित गिरोह के माध्यम से लूटा जा रहा है।
ओपी चौधरी के फंडिंग वाले बयान पर इस्तीफा दें पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह
ओपी चौधरी के बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा महामंत्री ओपी चौधरी ने देश से महादेव एप के माध्यम से करोड़ों रुपए की फंडिंग आतंकियों एवं डी कंपनी को किए जाने का गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे समझ में आता है कि केंद्र की मोदी भाजपा की सरकार देश को सुरक्षा देने में नाकारा और नाकाम साबित हुई है। देश के भीतर से हो रहे आतंकियों को फंडिंग रोकने में नाकाम नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह को तत्काल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए?
'यूपी में सटोरियों को क्यों बचाई बीजेपी सरकार'
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने ओपी चौधरी से पूछा जब महादेव एप के माध्यम से आतंकियों को फंडिंग होने का आरोप भाजपा लगा रही है। ऐसे में जब छत्तीसगढ़ पुलिस उन सटोरियों को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश गई थी तब योगी भाजपा की सरकार ने पुलिस भेजकर उन सटोरियों को बचाने के लिए सामने क्यों आयी? सटोरियों को पकड़ने के लिए गई छत्तीसगढ़ पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों की? आखिर उन सटोरियों के साथ भाजपा का क्या रिश्ता है? मोदी सरकार दुबई में बैठे उन सटोरियों के खिलाफ क्यों कार्रवाई नहीं की? जबकि राज्य सरकार ने दुबई में बैठे उन सटोरियों को गिरफ्तार करने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी है? जब भाजपा के महामंत्री ओपी चौधरी को महादेव एप के बारे में इतनी जानकारी है कि उनके 50 लाख यूजर्स है। 20 हजार कॉर्पोरेट गिरोह गृह है करंट सेविंग बैंक खाता और करीब ढ़ाई सौ सेल कंपनियां है तो क्या इसकी जानकारी मोदी सरकार को नहीं है? फिर केंद्र सरकार ने उन सेल कंपनियों पर क्यों कार्रवाई नहीं की? 20 हजार कॉर्पोरेट गिरोह पर क्यों कार्रवाई नहीं की?