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डेढ़ घंटे तड़पा बाबूलाल: शौच के लिए गए शख्स पर भालू ने किया हमला, अस्पताल में डॉक्टर ने नहीं किया इलाज; मौत

Thu, 11 Jul 2024 12:57 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही

सार

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में भालू ने शख्स पर हमला कर दिया। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाएगा। डॉक्टर ने इलाज करने में लापरवाही की, जिससे उसकी मौत हो गई। 
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मरवाही में भालू के हमले से एक व्यक्ति की मौत हो गई। ग्रामीण देर रात घर से कुछ ही दूरी पर शौच के लिए गया हुआ था, तभी भालू ने उस पर हमला कर दिया। घायल ग्रामीण को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही लाया गया था, जहां अस्पताल प्रशासन पर भी लापरवाही का आरोप लगा है। डॉक्टर की देरी की वजह से 108 एंबुलेंस स्टाफ और वार्ड बॉय अस्पताल में घायल का इलाज करते रहे। आरोप है कि महज 10 कदम दूर से डॉक्टर टेलीफोन से इलाज करवाते रहे। जनप्रतिनिधियों सहित परिजनों ने वन विभाग और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। 

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जानकारी के अनुसार, मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत लिटयासरई गांव में लटकोनीखुर्द का रहने वाला बाबूलाल रिश्तेदारी में आया हुआ था। देर रात शौच के लिए जब बाबूलाल घर के पास स्थित तालाब की ओर गया, तभी वहां पहले से मौजूद भालू ने ग्रामीण को देखकर उस पर हमला कर दिया। बाबूलाल ने किसी तरह खुद को भालू के चंगुल से बचकर घर तक पहुंचा। इसके बाद उसे 108 संजीवनी एक्सप्रेस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही लाया गया। 

हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर को मौजूद रहना था, लेकिन जब काफी देर तक डॉक्टर नहीं पहुंचा तो संजीवनी एक्सप्रेस के मेडिकल स्टाफ ने वार्ड बॉय के साथ मिलकर घायल ग्रामीण की चिकित्सा शुरू कर दी। उसे टांके लगाने के साथ-साथ अन्य उपचार दिया गया। डॉक्टरों की अनुपस्थिति की सूचना जिला पंचायत सदस्य को भी दी गई। लगभग 1:30 बजे रात तक डॉक्टर घायल की चिकित्सा में उपस्थित नहीं हो सका और लगभग 3:00 बजे घायल की मृत्यु हो गई। 
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मामले पर परिजनों और जिला पंचायत सदस्य ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लगभग डेढ़ घंटे गंभीर मामला आने के बाद डॉक्टरों का उपस्थित न होना अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। यदि डॉक्टर मौजूद होते तो कम से कम उसे जिला अस्पताल ही रेफर कर देते। वहीं, स्थानीय वन अमला भी नहीं पहुंचा। मामले पर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी का बयान पोल खोलने वाला है। 

वार्ड से डॉक्टर्स रूम की दूरी महज 10 कदम है, लेकिन वार्ड बॉय और संजीवनी एक्सप्रेस का स्टाफ घायल का उपचार करता रहा। गंभीर रूप से घायल के पहुंचने के बाद भी चिकित्सा उन्हें फोन पर इंस्ट्रक्शन देता रहा। परिजनों का आरोप मौके के विजुअल और मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों का आरोप भी इस बात की ओर ही इशारा कर रहा है कि डॉक्टर ने शुरुआती इलाज में लापरवाही की, जिसकी वजह से ग्रामीण की मौत हो गई।

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