वहीं, दूसरी ओर पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने भी पत्रवार्ता लेकर विधायक को आरोप सिद्ध करने की चुनौती दी। दस दिनों के भीतर आरोप सिद्ध करने पर उन्होंने मानहानि का दावा करने की बात कही है। गागड़ा ने पत्रवार्ता में कहा कि विधायक आदिवासियों के हित मे खड़े न होकर ठेकेदार के प्रवक्ता बनकर निराधार आरोप लगा रहे है। क्षेत्र में उनकी बन रही बुरी स्थिति से घबराकर उलजुलूल बयानबाजी कर रहे हैं। गागड़ा ने कहा कि सरकार, विभाग और पुलिस उनकी है। वे जांच करवाएं। गागड़ा ने विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा हितग्राहियों के हित में विभिन्न माध्यमो से लड़ रही हैं। लेकिन विधायक कहीं न कहीं ठेकेदार और डीएफओ को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। आंदोलन के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। इस पर विधायक चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
गागड़ा ने कहा कि विधायक के आरोप पर वे एसपी को आवेदन दे रहे हैं। इस विषय पर निष्पक्ष जांच हो और दस दिनों के अंदर हो। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। गागड़ा ने कहा कि विधायक ने जिस बैंक ट्रांजेक्शन का आधार दिखाया है। वह ट्रांजेक्शन ठेकेदार का ही है। चूंकि जिस खातेदार का स्टेटमेंट विधायक ने मीडिया के समक्ष रखा है। ठेकेदार उस खातेदार के यहां किराये पर रहता था। यहां का खाता नहीं होने की स्थिति में उनके खाते से ठेकेदार ट्रांजेक्शन किया करता था। गागड़ा ने कहा कि विधायक बिना सच जाने ही राजनीति फायदा लेने की जल्दबाजी दिखाई और सच्चाई से वाकिफ नहीं रहे। वहीं, उन्होंने कहा कि विधायक अपने आरोप को दस दिनों के भीतर साबित करें। आरोप साबित नहीं पर उन्होंने मानहानि का दावा करने की बात कही हैं।