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ट्रेन और मेंटेनेंस ट्रॉली की टक्कर: कूदकर कर्मचारियों ने बचाई जान, कोरबा से चांपा जा रही थी मेमू लोकल

Sun, 22 Jan 2023 06:58 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा

सार

सीनियर डीसीएम कश्यप के अनुसार यह ट्राली 100 से 150 किलो वजन की होती है। जिसे ट्रेन आने पर चार आदमी उठाकर पटरी से बाहर भी ले जा सकते हैं। ऐसे में फौरी तौर पर मामला संभाला जा सकता है। मोड़ होने के कारण वे त्वरित कार्रवाई नहीं कर सके होंगे।
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इंजन के पहियों को ठीक कर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के कोरबा में शनिवार दोपहर एक मेमू लोकल ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। चांपा की ओर जा रही लोकल ट्रेन के सामने अचानक से मेंटेनेंस ट्रॉली लिए कर्मचारी आ गए। ट्रेन के चालक ने देखा तो ब्रेक लगाया, लेकिन तब तक मेंटेनेंस ट्रॉली से उसकी टक्कर हो गई। इस बीच ट्रेन को सामने से आता देखकर कर्मचारियों ने ट्रॉली से कूदकर अपनी जान बचाई। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद ट्रेन को फिर से रवाना किया गया है। फिलहाल जांच के निर्देश दिए गए हैं। 

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चालक ने ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकने का प्रयास किया
जानकारी के मुताबिक, कोरबा रेलवे स्टेशन से दोपहर 1.30 बजे मेमू लोकल (ट्रेन नं. 08733) स्पेशल बिलासपुर के लिए रवाना हुई। बताया जा रहा है कि ट्रेन बालपुर-चांपा के बीच सिवनी के पास किलोमीटर नंबर 667 पर दोपहर करीब ढाई से तीन बजे के बीच पहुंची थी। इसी दौरान ट्रेन के सामने अचानक मेंटेनेंस ट्रॉली आ गई। यह देखकर मेंटेनेंस ट्रॉली पर सवार कर्मचारी कूद गए और अपनी जान बचाई। वहीं चालक ने भी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन टक्कर हो गई। 

इंजन के पहियों में खराबी आई, सुधार कर ट्रेन को रवाना किया गया
हालांकि घटना में कोई चोटिल नहीं हुआ है। ट्रेन के इंजन के पहियों में खराबी आ गई। उसे सुधार के बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया है। वहीं इस घटना के बाद कोरबा और बालपुर स्टेशन के अफसरों ने जानकारी से इनकार कर दिया। देर रात इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के सीनियर डीसीएम विकास कश्यप की ओर से बताया गया कि हादसे में कोई नुकसान नहीं हुआ है। घटना को लेकर संरक्षा विभाग को जांच करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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करवेचर की स्थिति, विजिबिलिटी कम
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर ट्रॉली से मेमू ट्रेन टकराई, वहां पर करवेचर जैसा मोड़ है। ऐसे में मोड़ पार करने के बाद विजिबिलिटी कम होती है। यही वजह है कि ट्राली में सवार कर्मियों को अचानक आई ट्रेन नहीं दिखी। ट्राली में सवार होकर पटरी पर काम करने वालों के लिए एक यह नियम भी होता है कि ट्राली से दोनों ओर 600-600 मीटर की दूरी पर दिन के वक्त लाल झंडी लेकर एक कर्मी निगरानी करता है, ताकि दोनों ओर अगर ट्रेन आए तो वह सावधान कर दें। 

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