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बालको चिमनी हादसा: सेपको कंपनी के चीनी अधिकारियों की याचिका खारिज, धारा 304 और 201 के तहत आरोप निर्धारित

Sun, 17 Sep 2023 05:55 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

कोर्ट ने धारा 304 और 201 के तहत आरोप निर्धारित किए हैं, जिसमें आरोपियों पर जानबूझकर जान जोखिम वाले काम करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप तय किए गए हैं। शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल मधुनिशा सिंह ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
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बालको चिमनी हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बालको में निर्माणाधीन 1200 मेगावाट विद्युत संयंत्र के लिए 275 मीटर ऊंचाई की दो चिमनियों का निर्माण होना था। इनमें से एक का निर्माण पूर्ण हो चुका था। तीन सितंबर 2009 को बारिश के दौरान बालको प्लांट में निर्माणाधीन 240 मीटर ऊंची चिमनी ढह गई थी। घटना में 40 मजदूरों की मौत हुई थी। चिमनी 1200 मेगावाट पावर प्लांट के लिए बन रही थी। 

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बालको में 14 साल पहले हुए चिमनी हादसे में हाईकोर्ट ने सेपको कंपनी के तीन चीनी अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी है। तीनों अधिकारियों ने कोरबा एडीजे कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन प्रस्तुत किया था। कोर्ट ने सेपको के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जिला कोर्ट में मामला चलाने का भी आदेश दिया है। जीडीसीएल, सेपको के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया। इसके बाद एडीजे कोर्ट ने 13 दोषियों के खिलाफ आरोप तय किए। इनमें चीनी ठेका कंपनी सेपको के प्रोजेक्ट मैनेजर व छूनान, ल्यू जाकसन, वांग क्यूंग शामिल हैं।

 

कोर्ट ने धारा 304 और 201 के तहत आरोप निर्धारित किए हैं, जिसमें आरोपियों पर जानबूझकर जान जोखिम वाले काम करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप तय किए गए हैं। शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल मधुनिशा सिंह ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।


एडीजे कोर्ट से आरोपियों की याचिका खारिज हो चुकी

मामले में पुलिस ने भी कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। इसमें बालको सहित चीनी ठेका कंपनी सेपको, उप ठेका कंपनी जीडीसीएल और एनसीसीबीएम के अधिकारियों पर भारतीय दण्ड विधान की धारा 304 जानबूझकर ऐसा कृत्य करना जिससे किसी की मृत्यु हो सकती हो और धारा 201 साक्ष्य छुपाने का आरोप लगाया गया था। इस पर आरोपियों ने धारा 304 को 304 ए, गैर इरादतन हत्या में बदलने के लिए याचिका दाखिल की थी। एडीजे कोर्ट ने आरोपियों के आवेदन को नामंजूर करते हुए सभी के खिलाफ धारा 304 और 201 के तहत आरोप निर्धारित किया। एडीजे कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।

 

मामले में बालको के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर विरल मेहता, अतिरिक्त महाप्रबंधक दीपक नारंग, जीटीई अतुल महापात्रा, चीनी ठेका कंपनी सेपको के प्रोजेक्ट मैनेजर वू छूनान, ल्यू जाकसन, वांग क्यूंग, उप ठेका कंपनी जीडीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज शर्मा, इंजीनियर आलोक शर्मा, सुनील सिंह विशक्ति पाल, व्यंकटेश, संजय देव, अनिरूद्ध और विकास भारती के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। इसके अलावा कोर्ट ने हादसे के बाद निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने वाले नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मटेरियल्स एनसीसीबीएम वल्लभगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ एमएन अंसारी, समूह प्रबंधक यूके मंडल और महाप्रबंधक आरके गोस्वामी को भी आरोपी बनाया है। इन पर साक्ष्य छुपाने और उनसे छेड़छाड़ करने का आरोप है। इसमें गोस्वामी की मृत्यु हो चुकी है।

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