पाली थाना क्षेत्र में 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा की विषैला पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन दिन तक उपचार के बाद छात्रा ने दम तोड़ दिया। मृतका के परिजनों ने गांव के ही 17 वर्षीय नाबालिग किशोर पर लंबे समय से छात्रा को परेशान और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। स्वजनों का कहना है कि किशोर रास्ते में छात्रा का पीछा करता था और उस पर मिलने के लिए दबाव बनाता था। परिजनों के अनुसार इसी प्रताड़ना और छेड़छाड़ से परेशान होकर छात्रा ने यह कदम उठाया।
परिजनों ने बताया कि मृतका पढ़ाई में काफी अच्छी थी। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था और वह अपनी मां के साथ रहती थी, जबकि उसके दो भाई रोजगार के सिलसिले में गांव से बाहर रहते हैं। परिजनों ने बताया कि छात्रा जब भी घर से कॉलेज जाने के लिए निकलती थी, आरोपी किशोर रास्ते में उसका पीछा करता था। आरोप है कि वह छात्रा को बीच रास्ते में रोककर मिलने के लिए दबाव बनाता था। परिवार का यह भी आरोप है कि किशोर छात्रा की मां और भाइयों के नाम सुसाइड नोट लिखकर खुदकुशी करने की धमकी दिया करता था। किशोर की हरकतों से परेशान होकर उन्होंने उसे बुलाकर समझाने का प्रयास भी किया था लेकिन उसकी हरकतों में सुधार नहीं आया।
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लगातार मानसिक तनाव और परेशानी के चलते छात्रा ने 3 सितंबर को जहरीली दवा खा ली। कुछ समय बाद हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने छात्रा की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रैफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में छात्रा का तीन दिन तक उपचार चला लेकिन हालत में सुधार नहीं होने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि किशोर द्वारा उसे परेशान किए जाने की जानकारी पुलिस को पहले ही मौखिक रूप से दी गई थी। इसके बावजूद मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए। परिजनों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
इस संबंध में कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर जिला अस्पताल चौकी में मृतका के स्वजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है।