छत्तीसगढ़ की दरभा घाटी में हमले की साजिश रचने वाले नक्सली नेता जीवीके प्रसाद उर्फ गुडसा उसेंडी ने बुधवार को पत्नी सहित सरेंडर कर दिया है।
हालांकि नक्सल रोधी स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (एसआईबी) ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
53 वर्षीय उसेंडी छत्तीसगढ़ में दंडकारण्य स्पेशल जोन कमेटी का प्रवक्ता था और उसके सिर पर 20 लाख रुपए का इनाम था।
पिछले साल दरभा घाटी में कांग्रेसी नेताओं के कत्लेआम की साजिश भी इसी ने रची थी। इस हमले में कांग्रेसी नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे।
वह पिछले 25 साल से नक्सली गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। उसेंडी को अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
माना जा रहा है कि उसेंडी का समर्पण नक्सलियों के लिए बड़ा झटका साबित होगा क्योंकि वह संदेश, बयान या प्रेस रिलीज मीडिया और नेताओं तक पहुंचाने में माहिर है।
इसके अलावा फर्जी पते से इमेल आदि भेजने में भी उसका कोई जवाब नहीं है। वह पढ़ने लिखने में भी काफी तेज है। इसी वजह से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के थिंक टैंक का भी अहम हिस्सा था।
हालांकि वह हत्या को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने के पक्ष में था। नवंबर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में किशनजी की हत्या के बाद वह और ज्यादा मुखर हो गया था। शायद इसी वजह से उसने खुद को अलग कर लिया है।