25-26 दिसंबर की रात एक शव मिलने की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान करने में धोखा खा गई। पुलिस ने शव की पहचान ऑटो मालिक शंकर शास्त्री के रूप में की। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया। जिसे परिजनों ने अपने गाँव बिलासपुर भाठापारा में दफ़न कर दिया।
पंतोरा पुलिस ने ऑटो चालक शंकर शास्त्री की हत्या के मामले में आरोपी की तलाश शुरू की, बिलासपुर, बलौदा और पंतोरा के सीसटीवी फुटेज को खंगाला गया जिसमें ऑटो में चालक के साथ एक सवारी भी दिखी। साइबर पुलिस को रात में झारखण्ड के चुरामन साव का मोबाईल लोकेशन घटना स्थल पर मिला और उसी नंबर के वाट्सअप में कोरबा पुराना बस स्टैंड के ज्योति होटल का लोकेशन मिला, जिसके आधार पर पुलिस ने चुरामन साव की तलाश शुरू की और एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस ने आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की जिसमे आरोपी ने खुद को ऑटो चालक शंकर शास्त्री होना बताया और मृतक को चुरामन साव होना बताया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चुरामन साव झारखण्ड से बिलासपुर पंहुचा था, 25 दिसंबर की रात कोरबा जाने की तैयारी में था लेकिन बस और ट्रेन नहीं होने के कारण शंकर शास्त्री के ऑटो को 12 सौ रूपये में किराये पर लेकर कोरबा जा रहा था। बिलासपुर से निकलने के बाद ऑटो कई बार रुक-रुक कर चलने लगी, जिसके कारण चुरामन साव ने चालक के साथ गाली गलौज कर दी, दोनों ने शराब की रखी थी। चुरामन के गाली गलौज करने से ऑटो चालक ने चुरामन को मारने का मन लिया। रास्ते में ऑटो चाालक ने चुरामन की पत्थर से तुचलकर हत्या कर दी।
इतना ही नहीं आरोपी ने मृतक के कपडे खुद पहन लिया और अपने कपड़े, आधार कार्ड और मोबाइल मृतक के पास छोड़ दिया जिसके कारण पुलिस ही नहीं उसके परिजन भी धोखा खा गए और शंकर शास्त्री का शव समझकर दफन कर दिया। इस मामले के खुलासा होने के बाद पुलिस ने झारखण्ड में चुरामन साव के परिजनों को सूचना देकर बुलाया है और दफन शव की पहचान करने के लिए दंडाधिकारी से खुदाई की अनुमति मांगी है।