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फ्रांस के सैलानियों को भाया बस्तर: चींटी की चटनी का चखा स्वाद, संस्कृति और नजारे देख दोबारा आने का किया वादा

Mon, 29 Jan 2024 05:06 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

सैलानियों ने नियानार माध्यमिक विद्यालय में जाकर गणतन्त्र दिवस के कायक्रम को देखा। बस्तर कला गुड़ी में पेंटिंग समेत अन्य प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया।
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बस्तर के खानपान का स्वाद लेते पर्यटक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बस्तर में प्रति वर्ष हजारों विदेशी सैलानी यहां की प्रकृति, रहन-सहन के साथ ही यहां की संस्कृति को देखने के लिए आते रहते है। लेकिन इस बार पहली बार फ्रांस से पहुंचे सामाजिक सेवा करने वाले दंपती यहां के रहन-सहन से काफी खुश नजर आए और लाल चींटी की चटनी को भी चखा। साथ ही बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों के लोगों के साथ रहकर नए-नए अनुभव लिए। यहां की आवभगत से प्रसन्न होकर बस्तर दोबारा आने की बात भी कही।

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बताया जा रहा है कि फ्रांस के दंपती में मर्लिन, उनके पति एरिक, वेरोनिक, क्लाउड एवं मेरी पहली बार बस्तर आए। क्लाउड और मेरी 85 वर्ष के होने के साथ ही फ्रांस में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लागातार सक्रिय रहकर कार्य कर रहे है। ये सभी फ्रांसीसी सैलानी अक्सर पांडिचेरी आते रहते हैं और अपनी छुट्टियां यहीं बिताते थे, लेकिन पर इस बार जब वे गुगल मैप से आसपास के पर्यटन क्षेत्र की खोजबीन कर रहे थे तो उन्हें कांगेर वेली पर जानकारी मिली, तो बरबस ही यहां आने का निश्चय भी किया।

वे गूगल के माध्यम से इस क्षेत्र की जानकारी इकट्ठा कर रही थीं तब उन्हें यहां की संस्कृति, बाजार, मेले-मड़ाई के अलावा अतिरिक्त नक्सलवाद से संबंधित जानकारी भी मिली। पांडिचेरी के स्थानीय लोगों से जब बस्तर जाने की बात कही तो अधिकांश लोगों ने उन्हें बस्तर ना जाने व गलत भ्रामक जानकारी भी दी। इसी मध्य उन्हें बस्तर ट्राइबल होमस्टे के विषय में भी पता चला तो उन्होंने शकील रिजवी से संपर्क किया। शकील ने विस्तारपूर्वक बस्तर के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई और उन्हें बस्तर आने का न्योता दिया। सभी सैलानी 22 जनवरी को बस्तर पहुंचे। बस्तर के करपावण्ड ग्राम का मेला, तीरथगढ़, चित्रकोट, दरभा और नानगुर का बाजार, एंथ्रोपोलॉजी म्यूजियम के साथ स्थानीय कलाकार महेश सागर से मिलने भी पहुंचे।
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बस्तर ट्राइबल होमस्टे में रहकर उन्होंने स्थानीय भोजन का आनंद लिया। कांगेर वेली स्थित गुड़ियापदर व बामनारास में गोंड व धुरवा जनजाति समाज की जीवनशैली व नृत्य को देखा और उसे बेहद सराहा भी। बस्तर की लाल चींटी की चटनी का भी आनंद लिया। 26 जनवरी को  सैलानियों के द्वारा नियानार माध्यमिक विद्यालय में जाकर गणतन्त्र दिवस के कायक्रम को देखा और बच्चों का उत्साहवर्धन किया और बस्तर कला गुड़ी में तमन्ना जैन और उनके छात्रों से मिलकर बस्तर पेंटिंग भी देखी। सभी सैलानियों का यह मानना था कि भारत का यह क्षेत्र नितांत ऐसा क्षेत्र है, जहां न केवल संस्कृति, कला और शानदार जीवन शैली है, बल्कि वनों से आच्छादित यह क्षेत्र सुंदर जल प्रपात, पशु पक्षियों से परिपूर्ण है। यहां का पारिस्थितिक तंत्र बेहद नाजुक है और इसे सहेजने की भी आवश्यकता है।
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