केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में अर्धसैनिक बलों की 150 टीमों को भेजने का आदेश दिया है। यह संख्या अन्य राज्यों से ज्यादा है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोन ने राज्यों में होने वाले चुनावों की तारीख की अभी तक घोषणा नहीं की है। गृह मंत्रालय ने शांतिपूर्वक चुनावों के लिए राज्य सरकारों और बलों को निर्देश भी जारी किए हैं।
अधिकारी ने बताया कि ये सेना बल नक्सल विरोधी ऑपरेशन करेंगे और कानून व्यवस्था को भी बनाए रखेंगे। इन अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिसकर्मियों को 15 अक्तूबर तक अपनी जिम्मेदारी संभालने को कहा गया है। सुरक्षा के लिहाज से मंत्रालय ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 25000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का आदेश दिया है। ये जवान चुनाव के लिए भेजे जाने वाले अतिरिक्त 250 कंपनियों का हिस्सा हैं। इसमें से 50-50 कंपनियां राजस्थान और मध्यप्रदेश भेजी जानी है। और सबसे ज्यादा यानि 150 छत्तीसगढ़ के लिए भेजी जाएंगी। एक कंपनी में 100 जवान होते हैं।
इस साल जुलाई में केंद्र सरकार ने जानकारी दी थी कि बीएसएनएल द्वारा लगाए गए 532 टावर को वामपंथी अतिवादी इलाकों में लगाया गया था। इनमें से 521 ने काम करना शुरू कर दिया है। वहीं सबसे ज्यादा प्रभावित जिले जैसे दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर में बीएसएनएल द्वारा लगाए गए 180 मोबाइल टावर 22 जुलाई 2017 से ही शुरू हो गए हैं।
लेकिन केंद्र सरकार ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि नक्सल गतिविधियों के अलावा खराब भूगोलीय संरचना और पहाड़ी इलाका होने के कारण नेटवर्क में परेशानी आती है। सरकार ने इस साल मई में बताया था कि छत्तीसगढ़ के 16 वामपंथी जिलों में 1028 मोबाइल टावर के लिए मंजूरी दी गई है।
जिन सुरक्षा बलों को छत्तीसगढ़ भेजा जा रहा है, गृह मंत्रालय ने उनके लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। उनसे सुरक्षा और अन्य जरूरतों के लिए अपने नाइट विजन उपकरण, सेटेलाइट फोन जैसे संचार उपकरण, बुलेट प्रूफ जैकेट, जीपीएस प्रणाली और बख्तरबंद गाड़ियां साथ ले जाने को कहा गया है। मोबाइल नेटवर्क के होने से वह एक दूसरे से संपर्क कर पाएंगे।