मरवाही वन मंडल में लगतार हाथियों को उत्पात जारी है। पिछले 15 दिनों से अधिक समय से 5 जंगली हाथियों का दल कोरबा जिले से मरवाही मंडल पहुंचा और उसके बाद मध्यप्रदेश और फिर वहां से वापस मरवाही वन मंडल पहुंचकर हाथी लगातार ग्रामीणों के घरों और फसलों को नुकसान पहुचा रहा है। तो वन विभाग के पास सिर्फ हाथियों से निपटने के लिए उनकी निगरानी के सिवाय कोई उपाय नहीं है।
कभी भालुओं के नाम से प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखने वाले मरवाही वन मंडल में इन दिनों भालु कम ही दिखाई दे रहे हैं। इन दिनों मरवाही वन मंडल में हाथियों का उत्पात अधिक देखने को मिल रहा है। ये 5 हाथियों का समूह दो सप्ताह पहले कोरबा जिले की सीमा से मरवाही वन मंडल के मरवाही परिक्षेत्र में दाखिल हुआ था। जहां पर लगातार इन 5 हाथियों के समूह क्षेत्र में विचरण कर रहा है।
ये हाथियों का दल मरवाही वन मंडल के मरवाही, दानीकुंडी, नाका, झिरना पोड़ी होते हुए मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में दाखिल हो गया और वहां से जिले के गौरेला वन परिक्षेत्र में पहुंच गया। जहां पर जमकर उत्पात मचाया। मध्यप्रदेश के सीमावर्ती इलाके से फिर वापसी करते हुए मरवाही वन मंडल में पहुंच गया। देर रात इन 5 हाथियों का समूह मरवाही के कुम्हारी गांव के आसपास जमकर उत्पात मचाते हुए 3 से 4 ग्रामीणों के घरों को निशाना बनाया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी भी ग्रामीण को कोई नुकसान नहीं हुआ।
घर में तोड़फोड़ और घरों में रखे राशन को भी हाथियों ने खा लिया। जंगल से लगे खेत बाड़ी में भी हाथियों ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं वन विभाग के पास हाथियों से लोगों को सुरक्षित करने के लिए कोई भी उपाय नहीं हैं। वह अमला बस खुद को सुरक्षित रखते हुए हाथियों की निगरानी कर रहा है और जिस इलाके में हाथी मूमेंट करते हैं। उन इलाकों में मुनादी कराते हुए ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से मना करते हैं। फिलहाल, जिन इलाकों में हाथी की मौजूदगी है। उन इलाकों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में काफी दहशत में है।