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बिलासपुर: फर्जी हस्ताक्षर और सील से कराया पांच प्राध्यापकों का तबादला, केस दर्ज

Thu, 01 Oct 2026 06:01 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

शहर के तारबाहर स्थित पीजीबीटी कॉलेज में फर्जी हस्ताक्षर और सील के सहारे पांच प्राध्यापकों का तबादला कराने का गंभीर मामला सामने आया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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बिलासपुर शहर के तारबाहर स्थित पीजीबीटी कॉलेज में फर्जी हस्ताक्षर और सील के सहारे पांच प्राध्यापकों का तबादला कराने का गंभीर मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त तत्कालीन प्राचार्य की शिकायत पर तारबाहर थाना पुलिस ने इस फर्जीवाड़े की जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस अब उन फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले आरोपियों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस कूट रचित प्रस्ताव को तैयार किया था।
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फर्जी प्रस्ताव बनाकर कराया तबादला
पीजीबीटी कॉलेज की सेवानिवृत्त तत्कालीन प्राचार्य मीता मुखर्जी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि किसी ने संस्था की सील और उनके फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग करके एक फर्जी तबादला प्रस्ताव तैयार किया। इसके बाद इस कूटरचित प्रस्ताव को स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय और संचालक के समक्ष पेश किया। इसी प्रस्ताव के आधार पर विभाग ने कॉलेज के पांच शिक्षकों का स्थानांतरण दूसरी जगह कर दिया। स्थानांतरण पाने वाले शिक्षकों में सहायक प्राध्यापक नूर मोहम्मद रिज्वी, व्याख्याता करीम खान, डॉ. सलीम जावेद और विद्याभूषण शर्मा समेत पांच प्राध्यापक शामिल हैं। फर्जीवाड़े की आशंका होने पर पूर्व प्राचार्य ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच तारबाहर थाना पुलिस को सौंपी।

जांच में उजागर हुई हस्ताक्षर की गड़बड़ी
पुलिस जांच के दौरान पुलिस ने कॉलेज पहुंचकर वहां से संबंधित मूल दस्तावेज और संस्था की सील को जब्त किया। पुलिस ने मामले से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस टीम ने पूर्व प्राचार्य मीता मुखर्जी के अलावा गवाह सोहित कुमार पटेल, अमर कुमार मलिक, माया दत्ता और कॉलेज के कार्यालय कर्मचारी सुखनंदन लाल साहू के बयान दर्ज किए। जब पुलिस ने कॉलेज से जब्त किए गए मूल दस्तावेज और संस्था की सील का मिलान किया तो बड़ा खुलासा हुआ। दस्तावेज पर किए गए दस्तखत तत्कालीन प्राचार्य के असली हस्ताक्षर से मेल नहीं हुए।
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आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस
हस्ताक्षर का मिलान न होने और फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद तारबाहर पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम अब उस व्यक्ति और समूह की पहचान करने में जुटी है जिसने यह फर्जी दस्तावेज तैयार किया और सील का दुरुपयोग किया। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस फर्जी प्रस्ताव को मंत्रालय और संचालक तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी। जांच अधिकारियों का कहना है कि फर्जी हस्ताक्षर और सील का इस्तेमाल करने वाले लोगों को जल्द चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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