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डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉस्पिटल रायपुर की बड़ी सफलता: हार्ट की बाइपास सर्जरी में खून के थक्के को भाप बनाकर निकाला

Sun, 28 May 2023 02:19 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टर्स ने एक बार फिर कमाल किया है। हार्ट की बाइपास में खून के थक्के को भाप बनाकर निकला है। यह प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है, जिसमें एसीआई के डॉक्टर्स को सफलता मिली है।
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टर्स ने एक बार फिर कमाल किया है। हार्ट की बाइपास में खून के थक्के को भाप बनाकर निकाला है। यह प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है, जिसमें एसीआई के डॉक्टर्स को सफलता मिली है। 73 साल के बुजुर्ग मरीज के हार्ट में 16 साल पहले हार्ट की बाइपास सर्जरी हुई थी, फिर से बाइपास ग्राफ्ट में खून का थक्का जमने लगा था। डॉक्टर्स ने जमे हुए खून के थक्के को लेजर विधि से भाप बनाकर निकाला है। 
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बताया जाता है कि 73 साल के बुजुर्ग को दिल की बीमारी थी। उन्होंने 16 साल पहले दिल की बाइपास सर्जरी कराई थी। इस दौरान बनाये गये ग्रॉफ्ट में ब्लॉक हो गया था। कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.(प्रो.)स्मित श्रीवास्तव और टीम ने लेजर के माध्यम से भाप बनाकर निकाला है। डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि सर्जरी के दौरान बनाए गए ग्राफ्ट में खून का थक्का जमकर हार्ड हो गया था। लगभग 99 प्रतिशत ब्लॉकेज को एक्जाइमर लेजर कोरोनरी एथेरेक्टॉमी विधि से भाप बनाकर निकाला गया है। यह राज्य का पहला केस है। उन्होंने बताया कि पैर की नसों के माध्यम से बाइपास  ग्राफ्ट तक पहुंचकर लगभग सिर के बाल बराबर पतले रास्ते में कैथेटर को अंदर डाला गया। इस ब्लॉकेज को खोलना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।
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डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि 73 साल के बुजुर्ग को दिल की बीमारी थी। रायपुर में साल 2007 में एक निजी हृदय चिकित्सालय में बाइपास सर्जरी हुई थी। 15-16 साल के बाद इसमें दिक्कतें आने लगी। बाइपास  के दौरान लगे चार ग्राफ्ट में से दो ग्राफ्ट खराब हो गए थे। इस ग्राफ्ट में से एक तो पूरा बंद हो गया था। वहीं दूसरा ग्राफ्ट में 99 प्रतिशत ब्लॉकेज के साथ रक्त का थक्का जम गया था। इस कारण मरीज को हार्ट अटैक आया, जिसका इलाज एसीआई को सौंपा गया। उम्र ज्यादा होने से इस केस को गंभीरता लेते हुए एक्जाइमर लेजर कोरोनरी एथेरेक्टॉमी विधि को अपनाया गया।
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एक्साइमर लेजर कोरोनरी एथेरेक्टॉमी विधि का प्रयोग
इस विधि से खून के थक्के को भाप बनाकर निकालने की योजना सफल रही। 99 प्रतिशत ब्लॉकेज को पतले वेन में बहुत ही सावधानी से पहुंचकर लेजर के जरिये खून के थक्के को भाप बनाकर निकालते हुए नस को खोला गया। बता दें कि बाइपास की नस बहुत ही नाजुक होती है। इसके टूटने की संभावना होती है। उन्होंने कहा कि दोबारा इस तरह की घटना होने से जोखिम और बढ़ जाता। बाइपास की नसें बंद होने के बाद कुछ विकल्प नहीं रहता है। यदि दुबारा बाइपास करना हो तो छाती को फिर खोलना पड़ता है। इससे बहुत ज्यादा जोखिम रहता है, इसलिए बाइपास की नस को खोलने के लिए एक्साइमर लेजर कोरोनरी एथेरेक्टॉमी विधि सही साबित हुआ। 
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