छत्तीसगढ़ ही नहीं देश में हॉकी की नर्सरी के नाम से मशहूर राजनांदगांव में गाहे-बगाहे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद भी चुनावी मुद्दा बन गए हैं।
कोई छह दशक से भी अधिक समय से राजनांदगांव में पूर्व रियासत के राजा महंत सर्वेश्वर दास स्मृति अखिल भारतीय हॉकी स्पर्धा होती आ रही है, जिसमें न जाने कितने ओलंपियन हिस्सा ले चुके हैं, बल्कि कई खिलाड़ियों को तो यहां खेलने की वजह से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, जिनमें डुंगडुंग का नाम खासतौर से लिया जाता है। यही नहीं, यहां के हॉकी खिलाड़ी एरमन बेस्टियन रोम ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा थे।
हॉकी की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की पहल से अब राजनांदगांव में अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम बन रहा है। पचास हजार दर्शकों की क्षमता वाला दिग्विजय स्टेडियम यहां पहले से है, लेकिन जल्द ही एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम बनकर तैयार हो जाएगा।
डॉ रमन अपनी उपलब्धियों में एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम का उल्लेख करना नहीं भूलते। मगर मुश्किल यह है कि
हॉकी से जुड़े रहे और कभी राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी का जौहर दिखा जा चुके कांग्रेसी महापौर नरेश डाकलिया उन्हें यह श्रेय अकेले कैसे लेने दें।
डाकलिया के मित्रों में भारतीय टीम के गोलकीपर रहे मीर रंजन नेगी का भी नाम है। सो, डाकलिया की पहल से इस निर्माणाधीन स्टेडियम के ठीक सामने मेजर ध्यानचंद का स्मारक बनाया जा रहा है, जिसमें हॉकी के जादूगर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। हालांकि चुनाव की वजह से इसका अनावरण नहीं हो सका है।