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धमतरी: राज्योत्सव और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने पर शिक्षक निलंबित, डीईओ कार्यालय का हुआ घेराव

Sat, 08 Nov 2025 09:14 PM IST
राहुल तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

सार

धमतरी के कुरूद ब्लॉक में सहायक शिक्षक ढालू राम साहू को शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करने पर निलंबित कर दिया गया। संगठन ने विरोध जताते हुए डीईओ कार्यालय का घेराव किया, आश्वासन मिलने पर मामला शांत हुआ।

 
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डीईओ कार्यालय पर प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धमतरी जिले के एक सहायक शिक्षक को बच्चों के भविष्य की चिंता करना भारी पड़ गया। दरअसल, स्कूल में अब तक बच्चों को किताबें नहीं मिली थीं, जबकि राज्य स्थापना दिवस का उत्सव मनाया जा रहा था। इसी पर नाराज होकर शिक्षक ढालूराम साहू ने अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर लिखा कि जब तक सभी बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल जातीं, तब तक सहायक शिक्षक से लेकर बीईओ, डीईओ, कलेक्टर और शिक्षा मंत्री तक का वेतन रोक देना चाहिए।

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इस पोस्ट पर शिक्षा विभाग ने संज्ञान लेते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया। निलंबन की कार्रवाई से शिक्षक संगठन भड़क गया और उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी का घेराव किया। बहाली की मांग को लेकर घंटों हंगामा चलता रहा, जिसके बाद बहाली के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।

धमतरी में शिक्षा विभाग ने एक ऐसे शिक्षक को निलंबित कर दिया, जिसने राज्योत्सव की चमक-दमक के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकत दिखा दी। बताया जा रहा है कि कुरूद ब्लॉक के ग्राम नारी प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षक ढालू राम साहू ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के रवैये पर टिप्पणी की थी। 
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विभाग ने इस पोस्ट को शासन के कार्यों के विरुद्ध मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबन आदेश में कहा गया कि 'संबंधित शिक्षक ने बच्चों की शिक्षा व्यवस्था ठप्प है और हम चले राज्योत्सव मनाने।' जैसी टिप्पणी कर शिक्षकीय आचरण का उल्लंघन किया है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इस कार्रवाई के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या किसी सरकारी कर्मचारी को अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का अधिकार नहीं है? क्या स्कूल में बच्चों को किताबें न मिलना शासन विरोधी टिप्पणी कहलाएगा या व्यवस्था की सच्चाई? शिक्षा अधिनियम 2005 के अनुसार, हर बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। इस अधिनियम के तहत सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए।

वहीं शिक्षक के ऊपर निलंबन की कार्रवाई से शिक्षक संगठन आक्रोशित हो गए। और DEO कार्यालय पहुंचकर शिक्षक ढालू राम की बहाली को लेकर घंटों हंगामा किया। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी निलंबित ढालू राम साहू को वापस बहाल करने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

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