छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में आज 8 नवंबर को दीपावली पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दिवाली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्योहार बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या आए थे, जिसके स्वागत में अयोध्या के लोगों ने दीपक जलाकर स्वागत और खुशियां मनाई थीं। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता ही पूजा करने विधान होता है। शास्त्रों के अनुसार, दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल और निशिता काल में होती है। दिवाली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और खुशहाली आती है।
दीपावली का पर्व अमावस्या तिथि को मनाने का विधान है। 8 नवंबर को सुबह 11:29 से लेकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 तक रहने वाली है। इस बार दीपावली में स्वाति नक्षत्र और कार्तिक अमावस्या का विशेष संयोग भी बन रहा है।
ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया कि इस बार दीपावली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। अमावस्या की शुरुआत 11:29 सुबह से होगी। राहुकाल शाम 4 बजे से लेकर 5:25 तक रहेगा। आमतौर पर 4 लग्न होते हैं। स्थिर लग्न वृषभ लग्न वृश्चिक लग्न और कुंभ लग्न। वृषभ लग्न हर साल की तरह इस साल भी संध्या काल में रहेगी।
जानें दिवाली की तिथि और लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह करीब सुबह 11.29 से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल और अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी।
अमावस्या तिथि प्रारंभ - 08 नवंबर को सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त - 09 नवंबर को रात 12:31 बजे
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 08 नवंबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस समय स्थिर लग्न वृषभ काल भी मौजूद रहेगा। जिसमें मां लक्षमी की पूजा करना बहुत ही शुभ और फलदायी रहेगा।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
- शाम 05: 54 से 07:50 बजे
- प्रदोष काल - शाम 05:31 से 08:09 बजे
- वृषभ काल - शाम 05:54 से 07:50 बजे
- निशिता काल- रात 11:39 से 12:31
- सिंह लग्न - सुबह 12:25 से 02:42
गृहस्थों के लिए दिवाली की रात को प्रदोषकाल और स्थिर लग्न मुहूर्त में महालक्ष्मी पूजन सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वहीं निशिथ काल मुहूर्त तांत्रिक पूजा और काली पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
जानें पूजा सामग्री
चौकी, लाल या पीला कपड़ा, लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति, कलश, जल, गंगाजल, आम के पत्ते, नारियल, कलावा, देसी घी का मुख्य दीपक, सरसों या तिल के तेल का दीपक, अक्षत, रोली, हल्दी, चंदन, अबीर, गुलाल, दूर्वा , माला-फूल, खीर, बताशे, मिठाई, खील, कमलगट्टा, फल, सोने-चांदी के सिक्के, रुपए और कौड़ियां।
दिवाली लक्ष्मी पूजा-विधि
सबसे पहले दिवाली की शाम को घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें फिर इसके फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं। इसके बाद पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर सबसे पहले पूजा का संकल्प लें और भगवान गणेश को तिलक लगाकर फूल, फूल, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को लाल फूल, कमल, फल, खील, खिलौने, बताशे आदि अर्पित करें। पूजन समाग्री अर्पित करने के बाद घी का दीपक जलाएं और धूप सुगंधित करें। फिर विधि-विधान और मंत्रों के साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद लक्ष्मी और गणेश की आरती करें, फिर पूजा में भूल के लिए क्षमा प्रार्थना मांगे।
क्यों मनाई जाती है दीपावली?
दिवाली मनाने के बहुत सारे वजह हैं, जिसमें से एक कारण है कि इस दिन माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। कहते हैं कि समुद्र मंथन के बाद धन्वंतरी प्रकट हुए। इसलिए कहा जाता है कि लक्ष्मी समृद्धि की देवी है। संसार में समृद्धि लेकर प्रकट हुई है। दूसरा कारण राम का अयोध्या लौटना ये एक बड़ी बात थी। राम जब 14 साल का वनवास काटने के बाद वापस अयोध्या आये तो दीपावली पूजन मनाने की शुरुआत हुई।
लक्ष्मी जी के मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ।
"या देवि ! सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै नमोनमः !!
कुबेर मंत्र
ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दा
लक्ष्मी जी की आरती: ( Laxmi Aarti, Laxmi ji ki Aarti)
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
बोलिए लक्ष्मी माता की जय