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Children Death Case: MCH के बाल रोग विभाग की कमान CIMS के विशेषज्ञ को, पूर्व प्रभारी की वेतन वृद्धि रोकी

Sun, 25 Dec 2022 03:36 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबिकापुर

सार

अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज में चार बच्चों की मौत मामले में 12 दिसंबर को शासन ने मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह को पदमुक्त कर दिया था। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश विश्वकर्मा और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू एक्का को निलंबित कर दिया गया था। 

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अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का एमसीएच अस्पताल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज में चार बच्चों की मौत के मामले में अभी एक्शन थमा नहीं है। अब मातृ शिशु अस्पताल के SNCU के प्रभारी रहीं डॉ. सुमन तिर्की की वेतन वृद्धि रोक दी गई है। उनको पहले ही विभागाध्यक्ष के पद से भी हटा दिया गया था। उनकी जगह डॉ. केआर टेकाम को प्रभार दिया गया था। शासन ने अब CIMS बिलासपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर जैन को कमान सौंपी गई है। 

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शिशु रोग विभाग की तत्कालीन प्रभारी डॉ.सुमन तिर्की को पद से हटाते हुए नोटिस दिया गया था। बताया जा रहा है कि नोटिस का संतोष जनक जवाब नही मिलने पर डॉ. सुमन तिर्की की एक वेतन वृद्धि भी रोकने के आदेश दिए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव जनक कुमार ने यह आदेश जारी किया है। पहले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश विश्वकर्मा और स्त्री रोग विशेषज्ञ मंजू एक्का को निलंबित कर दिया था।
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20 दिन पहले 3 घंटे में चार बच्चों की हुई थी मौत
5 दिसबंर को तड़के अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग में संचालित SNCU में 3 घंटों में 4 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि लाइट जाने से वेंटिलेटर बंद हुआ, जिसके कारण बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद अंबिकापुर पहुंचकर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और स्वास्थ्य सचिव आर.प्रसन्ना ने अंबिकापुर पहुंचकर मामले की जांच के निर्देश दिए थे।

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स्वास्थ्य मंत्री ने पहले ही कार्रवाई की बात कही थी
लगातार लापरवाही की शिकायतों से भड़के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने पहले ही इशारा किया था कि अभी और कार्रवाई संभावित है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर से बेहतर कोआर्डिनेशन के लिए डॉक्टर रेलवानी भी असिस्टेंट एमएस और इंचार्ज ऑफ एमसीएच बनाए गए हैं। घटना तिथि को अवकाश पर होने के कारण डॉक्टर रेलवानी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

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