EOW की गिरफ्त में अशोक चतुर्वेदी
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तीन साल से फरार चल रहे छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी को आखिरकार एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। देर रात आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से उसे गिरफ्तारी किया गया। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से ACB उन्हें लेकर रायपुर के लिए रवाना हो चुकी है। अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं। इस ऑफिसर पर निगम में रहते हुए करोड़ों के घोटाले किए जाने का आरोप है। कोर्ट में जमानत खारिज होने के बाद से वो फरार चल रहे थे।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। टेंडर प्रक्रिया में धांधली और जालसाली कर करोड़ों के अनियमितता के मामले में एफआईआर कराई गई थी। साल 2019 में राज्य शासन ने चतुर्वेदी की प्रतिनियुक्ति खत्म करते हुए उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अटैच कर दिया था। इस निर्णय के विरूद्ध उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। दूसरी ओर टेंडर में अनियमितता की शिकायत के जांच की जिम्मेदारी ACB, EOW को सौंपी गई थी।
बीजेपी नेताओं के करीबी होने का भी आरोप
अशोक चतुर्वेदी पर कुछ बीजेपी नेताओं के करीबी होने का भी आरोप लगा था। दूसरी ओर बीजेपी नेता इससे साफतौर पर इंकार करते रहे हैं।
कई कांग्रेस नेताओं ने इस ऑफिसर के खिलाफ शिकायतें की थीं। साल 2020-21 में पाठ्य पुस्तक निगम में 6 करोड़ का टेंडर घोटाला सामने आया था। धोखाधड़ी कर दो बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी टेंडर भरे गए थे। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोर्ड के तत्कालीन जीएम अशोक ने अपनी करीबी कंपनी को ठेका दिलवाया था। जांच में घोटाले का पर्दाफाश होने पर EOW ने जीएम और उनके करीबियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज किया था।
98 लाख का घपला
ठेका लेने वाली फर्म के हितेश चौबे और फर्जीवाड़े में शामिल उनकी कंपनी के स्टाफ बृजेंद्र तिवारी और निगम की निविदा समिति के सदस्यों के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया था। मामले की जांच चल रही थी। इसमें खुलासा हुआ कि साल 2017-18 और 2019 के दौरान स्वेच्छानुदान के नाम पर 98 लाख का घपला हुआ है। इसमें किसी को इलाज के नाम पर तो किसी को सामान खरीदने के लिए पैसे दे दिए थे। मामले की शिकायत विनोद तिवारी ने की थी।