चुनावी जंग के लिए नेता खुद को तैयार करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। रमन सरकार के दिग्गज मंत्रियों में तोंद कम करने की होड़ लग गई है। इस कार्य के लिए कोई योग का सहारा ले रहा है तो कोई जिम में पसीना बहा रहा है। कई नेता तो सुबह से दौड़ लगा रहे हैं ताकि जब चुनावी दौड़ शुरू हो तो उनकी बढ़ती तोंद परेशानी का कारण न बन जाए। एक नेता को फिट देख दूसरे नेता भी फिटनेस को गंभीरता से ले रहे हैं। कई नेता पांच से पंद्रह किलोमीटर पैदल चल रहे हैं तो कई नेता घर में ही जिम बनाकर कसरत कर रहा हैं।
इन मंत्रियों में छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे भी हैं। इन्होंने पिछले छह माह में 30 किलो वजन कम किया है। वो इस काम को बेहद गंभीरता से लेते हैं और पूरे दिन की व्यस्तता के बाद भी रात में 11 बजे अपने जिम में पहुंच जाते हैं। प्रेम प्रकाश पांडे ने अपना जिम बंगले के अंदर ही बनया है जहां ट्रेड मिल से लेकर मिनी जिम का सेट लगाया है। वो रोज समय निकालकर एक घंटे के लिए जिम जरूर पहुंचते हैं।
छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर इस सूची में दूसरा नाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की फिटनेस इन्हें काफी प्रभावित करती है। इनके पास स्वास्थ्य, ग्रामीण व पंचायत विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं लेकिन इन सब के बाद भी ये फिटनेस के लिए समय निकाल ही लेते हैं। चंद्राकर रोजाना आठ से दस किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्री जी ये नहीं चाहते कि चुनावी कसरत करते वक्त इनकी फिटनेस कोई समस्या खड़ी करे।
इन सब के बाद छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी कहां पीछे रहने वाले थे। वो भी अपने बगीचे में जमकर पसीना बहा रहे हैं। योगा और जॉगिंग के जरिए वे अपने वजन को नियंत्रित और खुद को फिट रखने की भरपूर कोशिश में लगे हुए है। इन मंत्रियों को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और दूसरे मंत्री-नेता भी फिटनेस को लेकर सतर्क हो गए। अब ये देखना काफी उत्साहित करने वाला होगा कि उनकी खुद को फिट रखने की कोशिश चुनाव प्रचार पर कितना असर डालती है।
छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां मतदाताओं तक पहुंचने के लिए नेताओं को कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। चुनाव के दौरान जनता से सीधा संपर्क करने के लिए उम्मीदवार और उनके समर्थक रोजाना 20 किलोमीटर तक की दूरी तय करते हैं। घर दूर-दूर होने के कारण नेताओं को समर्थकों के साथ पहाड़ी और नदियों के किनारे के क्षेत्र में भी पैदल ही संपर्क करना होता है।