जशपुर में खेती से संबंधित और हर्बल उत्पाद बनाने वाली एक कंपनी चलाने वाले समर्थ जैन ने कहा, महुआ के फूलों से बनने वाले अल्कोहल से सैनिटाइजर बनाने का विचार तब आया जब मैं अपने पेट्रोल पंप पर अपने कर्मचारियों के लिए पर्याप्त हैंड सैनिटाइजर नहीं जुटा पाया। वहां के आदिवासी इसके फूलों से देशी शराब बनाते हैं।
उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा कि इस संकट के समय में हम महुआ से बनने वाले अल्कोहल को और शुद्ध करके इससे हैंड सैनिटाइजर बना सकते हैं।' बता दें कि पीले रंग के महुआ के फूल गर्मी के मौसम में जंगल से पाए जाने वाले प्रमुख उत्पादों में से एक हैं। माना जाता है इस फूल में चिकित्सकीय गुण भी होते हैं। जशपुर क्षेत्र में महुआ के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं।
जैन ने कहा, जिला प्रशासन और वन विभाग से इसकी अनुमति लेने के बाद हम 'सिंगनी' नामक स्वयं सहायता समूह से मिले और तीन दिन में सैनिटाइजर का सैंपल तैयार कर लिया। जैन ने कहा, हम बड़े स्तर पर इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस और प्रमाणिकता मिलने की उम्मीद में हैं। स्वयं सहायता समूह इसका उत्पादन करेगा।
उन्होंने कहा, वन विभाग ने कच्चा माल उपलब्ध कराया और अभी तक हम ट्रायल के तौर पर 30 लीटर हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन कर चुके हैं। सैनिटाइजर को 100 मिलीलीटर की बोतल में लॉकडाउन की ड्यूटी में लगे पुलिस कर्मियों को वितरित किया गया है।
जशपुर के कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर ने कहा कि महुआ के अल्कोहल से बना सैनिटाइजर पूरी तरह से हर्बल है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इसे बनाने में इस्तेमाल की गई अल्कोहल की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुरूप है।