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छत्तीसगढ़ में आज धूमधाम से मन रहा छेरछेरा पर्व: सुबह से घर-घर पहुंच रहे बच्चे, जानिये इस त्योहार की खासियत

Sat, 03 Jan 2026 01:20 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Cherchera Festival 2025: छत्तीसगढ़ में आज तीन जनवरी यानी शनिवार को लोक आस्था का पर्व छेरछेरा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।
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छेरछेरा तिहार में डाली लेकर दान मांगती बच्चियां - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
Cherchera Festival 2025: छत्तीसगढ़ में आज तीन जनवरी यानी शनिवार को लोक आस्था का पर्व छेरछेरा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। महिलायें, बुजुर्ग समेत बच्चे और बच्चियां सुबह से ही टोली बनाकर लोगों के घरों में पहुंचकर छेरछेरा गीत गा रहे हैं। दान मांग रहे हैं। इस मौके पर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व छेरछेरा की बधाई और शुभकामनाएं दी है। प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है।



 
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मातारानी की पूजा अर्चना करते सीएम साय और डिप्टी सीएम शर्मा - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
सीएम साय ने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला छेरछेरा त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, दानशीलता की और समृद्ध गौरवशाली परम्परा का संवाहक है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं। छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है।  छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।

 
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बच्चों को धान दान करती महिला - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
सीएम साय ने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला छेरछेरा त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, दानशीलता की और समृद्ध गौरवशाली परम्परा का संवाहक है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं।

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छेरछेरा तिहार में डाली लेकर दान मांगती बच्चियां - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
सीएम साय ने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला छेरछेरा त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, दानशीलता की और समृद्ध गौरवशाली परम्परा का संवाहक है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं।
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धान का दान करती महिला - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
जानिये क्यों मनाते हैं ये त्योहार...
महादान और फसल उत्सव के रूप मनाया जाने वाला छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता और समृद्ध दानशीलता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व नई फसल के घर आने की खुशी में और पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।
 
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दान मांगते बच्चे - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
बच्चों के घर पहुंचने पर लोग उन्हें दान में चावल और धान देते हैं। इसी दिन बच्चे एकत्र होकर घर-घर जाकर धान मांगते हैं। बच्चे गाना गाते और झूमते हुए घर-घर जाकर धान मांगते है। सभी लोग बच्चों को धान और चावल दान में देते हैं। किसान बड़े ही धूमधाम के साथ इस पर्व को मनाते हैं। इस त्यौहार के दिन किसानों के घर में धान की नई फसल होने से धान की ढेर लग जाती है। 
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बच्चे ढोल-नगाड़े लेकर गीत गाते हुए यह पर्व मनाते हैं। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
ग्रामीण क्षेत्रों लोग धान दान करते हैं। छेरछेरा त्यौहार के दिन शाकम्भारी देवी की पूजा की जाती है। छेरछेरा पर्व से 15 दिन पहले ही बच्चे टोलियां बनाकर घर-घर जाकर दान मांगते हैं। इकट्ठा किए गए धान और राशि से वर्षभर के लिए कार्यक्रम बनाते हैं। वहीं बच्चे दान में मिले रुपए अपने लिए खर्च करते हैं।  इस पर्व में उत्पादित फसल को समाज के जरूरतमंद लोगों, कामगारों और पशु-पक्षियों के लिए देने की परंपरा है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं। इस दिन ‘छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा‘ गाते और बोलते हुए गांव के बच्चे, युवा और महिलाएं खलिहानों और घरों में जाकर धान और भेंट स्वरूप रुपए इकट्ठा करते हैं। 

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गीत गाकर दान मांगती महिलायें - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
छेरछेरा पर्व का महत्व
छेरछेरा का आध्यात्मिक महत्व भी है। यह तिहार (त्योहार) बड़े-छोटे के भेदभाव और अहंकार की भावना को खत्म करता है। फसल के घर आने की खुशी में पौष मास की पूर्णिमा को छेरछेरा पुन्नी तिहार मनाया जाता है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती भी मनाई जाती है। पौष पूर्णिमा धान के लिए प्रसिद्ध है। पूरे भारत में इस दिन लोग अन्न, दलहन-तिलहन का दान करना बेहद शुभ मानते हैं। यह भगवान सूर्य के उत्तरायण की प्रथम पूर्णिमा है, इसिलये इसका विशेष महत्व माना गया है।
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ढोल नगाड़े बजाते मंत्री टंकराम वर्मा - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
शाकंभरी माता की जयंती
शाकंभरी माता देवी भगवती की अवतार है। ऐसा माना जाता है कि देवी भगवती ने पृथ्वी पर अकाल और गंभीर खाद्य संकट को कम करने के लिए शाकम्भरी माता का अवतार लिया था। इन्हें सब्जियों, फलों देवी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन  पौष पूर्णिमा पर लोग पवित्र नदी पर जाकर स्नान करते हैं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
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