फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CG: बिना मान्यता के रायपुर में बेधड़क चल रहे स्कूल; बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, नहीं दे रहे टीसी, विभाग मौन

Thu, 18 Apr 2024 04:43 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

CG news: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बिना मान्यता के दो प्राइवेट स्कूल सालभर से बेहिचक धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस वजह से यहां पढ़ रहे एक हजार से ज्यादा स्कूली बच्चों का भविष्य अधर में है। उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
विज्ञापन
चैतन्य टेक्नो स्कूल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

CG news: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बिना मान्यता के दो प्राइवेट स्कूल सालभर से बेहिचक धड़ल्ले से चल रहे हैं। इस वजह से यहां पढ़ रहे एक हजार से ज्यादा स्कूली बच्चों का भविष्य अधर में है। उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन दो स्कूलों से पढ़कर दूसरे जगह प्रवेश लिए छात्रों को टीसी भी नहीं दिया जा रहा है। पालकों को टीसी के लिए स्कूल के लिए चक्कर लगवाये जा रहे हैं। इन्हें कभी एक महीने तो कभी 15 दिन तो कभी एक सप्ताह का समय देकर घूमाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली से जाहिर है कि जब स्कूल मान्यता प्राप्त है ही नहीं तो वो छात्रों को मॉर्कशीट कहां से देंगे। मामले में जिला शिक्षा विभाग उदासीन हैं या यूं कहे कि मौन हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में हैं। 

विज्ञापन


चर्चा तो ये भी है कि स्कूल और शिक्षा विभाग की मिलीभगत से ही बिना मान्यता के सालभर अधिक समय होने के बावजूद बेधड़क संचालित हो रहे हैं। नए शिक्षा सत्र में भी कक्षा 9वीं में प्रवेश लिया जा रहा है। बहुत सारे पालकों को इस संबंध में जानकारी ही नहीं है कि ये स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। जब उन्हें इस बात की जानकारी होती है तो उन्हें स्कूल और जिला शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। कई पालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल में टीसी के लिए आवेदन लगा रखे हैं पर उन्हें टीसी नहीं दिया जा रहा है। इस वजह से वो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं। कहा कि, स्कूल से खिलाफ बोलने पर हमारे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा सकता है। 

किराए के भवन में चल रहे स्कूल
दरअसल, रायपुर के सरोना और अमलीडीह में करीब डेढ़ साल से चैतन्य टेक्नो स्कूल चल रहे हैं। यहां स्कूल पहली से आठवीं तक संचालित हैं। जिनमें करीब 15 सौ से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इतना ही नहीं किराए के भवन में चल रहे इन स्कूलों में पालकों से मनमानी फीस वसूली जा रही है। रायपुर सहित पाच जिलों में ये स्कूल संचालित हो रहे हैं। एक-एक करके ब्रांच बढ़ाया जा रहा है। पालकों का कहना है कि नए शिक्षा सत्र से 9वीं और 10वीं कक्षा में प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। 
विज्ञापन


फीस के नाम पर वसूल रहे मोटी रकम
चैतन्य टेक्नो स्कूल सरोना में ट्यूशन, किताब,ऑनलाइन क्लासेस और यूनिफार्म के नाम पर पालकों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है। नर्सरी से पीजी-2 तक 61 हजार, पहली और दूसरी तक 66 हजार, तीसरी से पांचवी तक 71 हजार, छठवीं, सातवीं और आठवीं में क्रमश: 76 हजार, 81 हजार और 86 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी वार्षिक फीस ली जा रही है। कक्षा चौथी में प्रवेश लेने वाले छात्र से ट्यूशन फीस के नाम पर 55 हजार रुपये लिए जाते हैं। एक सेमेस्टर के लिए पुस्तक मटेरियल 6 हजार 555 रुपये में दिया जाता है।

बिना अनुमोदन फीस तय
बता दें कि किसी भी स्कूल में फीस का अनुमोदन वहां की व्यवस्था सुविधा के अनुसार होता है। ऐसे में बिना मान्यता वाले स्कूल का शुल्क कैसे अनुमोदित हो सकता है। समिति की ओर से फीस तय की जाती है। कलेक्टर स्तर की समिति जांच करके फीस अनुमोदित करती है, जो नहीं किया गया है। 

नवंबर 2023 में हुई थी नाममात्र की कार्रवाई
इसके पहले 23 नवंबर 2023 में इस मामले की शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की टीम ने इन दोनों स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर लिया था पर इन स्कूलों के मान्यता पर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। उस समय कार्रवाई के दौरान तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर हिमांशु भारतीय, सहायक संचालक जिला शिक्षा अधिकारी केएस पटले, बीईओ धरसींवा एम मिंज, सहायक बीईओ धरसींवा प्रदीप शर्मा के साथ वंदना शुक्ला, रविकांस डोये ने स्कूल पहुंचकर जांच की थी। 

'मान्यता के लिए हैं प्रयासरत' 
मामले को लेकर चैतन्य टेक्नो स्कूल सरोना के प्रिंसिपल पी. ऊषा से अमर उजाला ने बातचीत की तो उन्होंने कहा कि स्कूल की मान्यता के लिए प्रक्रिया प्रोसेस में है। इसके लिए वे प्रयासरत हैं। जिन छात्रों ने दूसरे स्कूल में प्रवेश लिये हैं, उनके पालकों को टीसी देने के लिए तीन महीने का समय दिया जा रहा है। हालांकि प्रिंसिपल ने निजी मामले से कैमरे के सामने बात करने से इंकार कर दिया। 

डीईओ ने नहीं दिया जवाब
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विजय कुमार खंडेलवाल से चर्चा के लिए हमने संपर्क किया और जानकारी लेने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। हमारी ओर से इस संबंध में मैसेज करने के बाद भी जबाव नहीं दिया गया। जब उनसे मुलाकात करने के लिए मौके पर पहुंचे, तो विभाग के कर्मचारियों ने मीटिंग में होने का हवाला देते हुए इंकार कर दिया। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें