प्रदेश में सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाला बिलासपुर संभाग खनन उद्योगों के साथ विद्युत उत्पादन और सियासत का भी पावर हाउस है। यहां विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव, दो मंत्रियों उमेश पटेल व जयसिंह अग्रवाल मैदान में हैं। पूर्व सीएम अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी, बहू ऋचा जोगी, आईएएस से राजनेता बने ओपी चौधरी और लखीराम अग्रवाल के पुत्र पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल भी मैदान में हैं। कई सीटों पर बसपा और जेसीसीजे के मजबूत दखल से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
कड़े मुकाबले में रेणु जोगी और उनकी बहू
जेसीसीजे से प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी कोटा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। यहां से भाजपा ने दिलीप सिंह जूदेव के पुत्र प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और कांग्रेस ने अटल श्रीवास्तव को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में लगभग तीन हजार वोटों से जीतीं रेणु जोगी की राह इस बार आसान नहीं है। जोगी की बहू ऋचा जोगी अकलतरा विधानसभा से मैदान में हैं। उनके खिलाफ भाजपा से विधायक सौरभ सिंह हैं। पिछले चुनाव में ऋचा लगभग 18 सौ वोटों से चुनाव हार गई थीं। कांग्रेस यहां बड़े अंतर से तीसरे स्थान पर रही थी। इस बार भी यहां आमने-सामने की लड़ाई है। अजीत जोगी के बिना परिवार के सामने अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखने की चुनौती है।
बसपा पर नजर
बसपा को यहां जांजगीर-चांपा और आसपास के क्षेत्र से हर चुनाव में दो सीटों पर जीत मिलती रही है। हालांकि, वोट प्रतिशत में लगातार गिरावट आ रही है। वर्ष 2008 के चुनाव में बसपा को 6.1 फीसदी वोट मिले थे। पिछले चुनाव में यह प्रतिशत 3.87 रह गया।
अब यह स्थिति
संभाग में सीटों की कुल संख्या 25 है। कांग्रेस विधायकों की संख्या 14 हो गई। जेसीसीजे के विधायक धर्मजीत सिंह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा की सीटें आठ हुईं और जेसीसीजे की सिर्फ एक रह गई।
प्रमुख मुद्दे
औद्योगिक संस्थानों में स्थानीय लोगों को रोजगार और उद्योगों का प्रदूषण बड़ा मुद्दा है। उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास का कोई इंतजाम नहीं। शहरों से गांवों की कनेक्टिविटी आज भी समस्या है। कई गांव ऐसे हैं, जहां पहुंचना आसान नहीं। कांग्रेस की कर्जमाफी और मोदी की गारंटी चर्चा का विषय है।