साहू की भावनात्मक अपील और भाजपा की यह रणनीति रही असरदार?
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि ईश्वर साहू भावनात्मक ढंग से यह चुनाव को लड़े। इस सीट पर करीब 60 हजार साहू वोटर हैं। वह निर्णायक होते रहे हैं। साहू समाज का एकमुश्त वोट ईश्वर साहू के पक्ष में पड़े इसके लिए भाजपा ने पूरी कोशिश की। साहू समाज के अलावा लोधी समाज बड़ी संख्या में इस सीट पर हैं। भाजपा की कोशिश रही थी कि सभी जातियों को ईश्वर के साथ खड़ा किया जाए। जानकार मानते हैं कि ईश्वर साहू को प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने चुनावों को धार्मिक रंग देने की कोशिश की।
ईश्वर ने 28 सालों तक विधायक रवींद्र चौबे को हराया
कांग्रेस का दावा कमजोर नहीं था। रवींद्र चौबे कांग्रेस के पुराने और कद्दावर नेता हैं। 1985 में वह पहली बार विधायक बने थे। अविभाजित मध्यप्रदेश और फिर छत्तीसगढ़ में कई विभागों के मंत्री और नेता प्रतिपक्ष रह चुके रविंद्र चौबे 28 सालों तक विधायक रहे। 2013 के चुनावों में पहली बार उन्हें 9620 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि अगले ही चुनाव में 2018 में उन्होंने फिर से 31,535 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।