छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल
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CG BJP Leader Anurag agrwal on Supreme Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ऑफ ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया। फैसले के मुताबिक, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा खत्म हो जायेगा। वहीं धर्म परिवर्तन के साथ ही एससी से जुड़े सभी संवैधानिक लाभ और अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।
इस फैसले के संबंध में छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा कि आध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया था कि इसाई धर्म में जाति की कोई व्यवस्था नहीं है। जो व्यक्ति हिंदू,सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा खुद ही खत्म हो जायेगा। वहीं धर्म परिवर्तन के साथ ही एससी से जुड़े सभी संवैधानिक लाभ और अधिकार भी खत्म हो जायेंगे।
उन्होंने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 लाया था, जिसमें इस प्रकार के किसी भी घटना के लिए एक नियम का पालन करने की बात की गई है। उच्चतम न्यायालय के फैसले ने कहीं न कहीं उस बात को एक बार फिर से सही साबित किया है हिंदू,सिख या बौद्ध धर्म के सिवाय किसी अन्य धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति का एसी का दर्जा खुद ही समाप्त हो जाएगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि यह प्रावधान पहले से ही संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 में स्पष्ट रूप से निर्धारित है। आदेश के क्लॉज 3 के मुताबिक, केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।
...तो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि किसी अन्य धर्म-जैसे ईसाई या इस्लाम-को अपनाने पर व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा और वह आरक्षण, कानूनी संरक्षण या अन्य वैधानिक लाभों का दावा नहीं कर सकता। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखते हुए दिया गया, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा बनाए नहीं रख सकते। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध पूर्ण रूप से लागू है और इसमें किसी प्रकार का अपवाद नहीं है। कोई भी व्यक्ति एक साथ अनुसूचित जाति की सदस्यता और क्लॉज 3 में वर्णित धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन नहीं कर सकता।