ICFRI की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRI) की अध्ययन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। ICFRI ने दो भागों की इस रिपोर्ट में हसदेव अरण्य की वन पारिस्थितिकी और खनन का उस पर प्रभाव का अध्ययन किया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह रिपोर्ट पेश करने के लिए कुछ और समय देने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख बढ़ाई
याचिकाकर्ताओं में से सुदीप श्रीवास्तव की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और अधिवक्ता नेहा राठी ने कहा कि सुनवाई आगे बढ़ाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन तब तक केंद्र और राजस्थान की ओर से पेड़ों की कटाई नहीं होनी चाहिए। उसके बाद उनकी ओर से अगली सुनवाई तक पेड़ नहीं काटने का वादा किया गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने का निवेदन स्वीकार कर लिया।
सुदीप श्रीवास्तव की याचिका में आबंटन को चुनौती
केंद्रीय वन मंत्रालय की ओर से साल 2011 में हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा ईस्ट केते बासन कोल ब्लॉक (PKEB) के पहले चरण की अनुमति दी गई थी। वहीं केंद्र सरकार की ही वन सलाहकार समिति ने जैव विविधता पर खतरा बताते हुए आवंटन को निरस्त करने की सिफारिश की थी। इसके बाद क्षेत्र को नो-गो घोषित कर दिया गया था। इसके बाद भी 2012 में अंतिम चरण का क्लीयरेंस जारी करते हुए कोयला खनन की अनुमति दे दी गई।